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28वाँ कलियुग और 120 करोड़ साल की यात्रा: सनातन कालचक्र का वैज्ञानिक रहस्य

28वाँ कलियुग और 120 करोड़ साल की यात्रा: सनातन कालचक्र का वैज्ञानिक रहस्य

28वाँ कलियुग, महायुग और आत्मा की अनंत यात्रा — सनातन कालचक्र का वैज्ञानिक रहस्य

A vast cosmic clock showing the transition of four Yugas (Satya, Treta, Dwapara, Kali) with a spiritual figure representing the eternal soul at the center

आपने जो विषय दिया है, वह केवल धार्मिक नहीं बल्कि सनातन काल विज्ञान (Vedic Time Science) का मूल आधार है। इसे सही तरह से समझा जाए तो मनुष्य को पहली बार एहसास होता है कि वह केवल एक शरीर नहीं बल्कि अरबों वर्षों से यात्रा कर रही चेतना आत्मा है।

महायुग क्या होता है

सनातन शास्त्रों के अनुसार चार युग होते हैं।

सतयुग 17,28,000 वर्ष

त्रेतायुग 12,96,000 वर्ष

द्वापरयुग 8,64,000 वर्ष

कलियुग 4,32,000 वर्ष

इन चारों को मिलाकर बनता है 1 महायुग 43,20,000 वर्ष। यह संख्या भागवत पुराण, विष्णु पुराण और सूर्य सिद्धांत में स्पष्ट रूप से दी गई है।

अभी कौन सा युग चल रहा है

हम वर्तमान में 28वें महायुग के कलियुग में हैं। यह वही महायुग है जिसमें श्रीराम त्रेता में अवतरित हुए, श्रीकृष्ण द्वापर में अवतरित हुए और यह महायुग अब अपने अंतिम चरण कलियुग में है।

28 महायुग कितने वर्ष होते हैं

1 महायुग 43,20,000 वर्ष होता है। 28 महायुग 43,20,000 गुणा 28 यानी 12,09,60,000 वर्ष होते हैं।

कलियुग लगभग 3102 BCE में आरंभ हुआ था। लगभग 5,127 वर्ष बीत चुके हैं। शास्त्रीय गणना के अनुसार कलियुग के लगभग 4,27,000 वर्ष शेष माने जाते हैं।

अब तक बीत चुका समय 12,09,60,000 में से 4,27,000 घटाने पर लगभग 12,05,33,000 वर्ष होता है।

अर्थात हमारी आत्मा इस सृष्टि चक्र में लगभग 120 करोड़ वर्षों से यात्रा कर रही है।

इसका वास्तविक अर्थ

इसका अर्थ यह है कि आप और मैं केवल इस जन्म के नहीं हैं। हमने अनगिनत बार जन्म लिया, मृत्यु पाई, राजा बने, भिखारी बने, देवयोनि और पशुयोनि पाई और फिर मनुष्य बने। फिर भी मोक्ष नहीं मिला क्योंकि हमने अभी तक वह चेतना अर्जित नहीं की जो इस जन्म मृत्यु के चक्र से बाहर निकाल सके।

सनातन धर्म यह नहीं कहता कि तुम एक बार पैदा हुए हो। सनातन कहता है तुम अनंत बार पैदा हो चुके हो। इसी कारण सनातन का लक्ष्य स्वर्ग नहीं बल्कि मोक्ष है। स्वर्ग भी चक्र के भीतर है, मोक्ष चक्र के बाहर।

आधुनिक विज्ञान और सनातन

आधुनिक भौतिकी कहती है कि ऊर्जा कभी नष्ट नहीं होती, केवल रूप बदलती है। वेद यही बात हजारों वर्ष पहले कह चुके हैं कि आत्मा न जन्म लेती है और न मरती है।

निष्कर्ष

यदि मनुष्य यह समझ ले कि वह 120 करोड़ वर्षों से जन्म ले रहा है और अभी भी फँसा है, तो उसका अहंकार टूट जाएगा और साधना शुरू हो जाएगी। तब उसे दिखेगा कि यह जीवन अंतिम अवसर भी हो सकता है। यही सनातन का गूढ़ रहस्य है।

🕉️ जय सनातन

लेखक / Writer : तु ना रिं 🔱
प्रकाशन / Publish By : सनातन संवाद


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