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Madras High Court Upholds Karthigai Deepam Tradition | Religious Freedom Verdict

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मद्रास हाईकोर्ट ने दीपथून (कार्तिगै दीपम) परंपरा को दी मान्यता

Karthigai Deepam festival lamps Tamil Nadu

चेन्नई | 6 जनवरी 2026 | स्रोत: The Economic Times

धार्मिक परंपराओं से जुड़े एक अहम घटनाक्रम में मद्रास उच्च न्यायालय द्वारा दीपथून (कार्तिगै दीपम) से संबंधित पूर्व आदेश को बरकरार रखा गया है। इस निर्णय के साथ ही परंपरागत रूप से दीप जलाने की प्रथा को न्यायिक मान्यता मिली है। फैसले के बाद धार्मिक समूहों और श्रद्धालुओं ने इसे सामान्य धार्मिक परंपरा की जीत करार दिया है।

अदालत के निर्णय के अनुसार, दीपथून/कार्तिगै दीपम जैसी सदियों पुरानी परंपराएँ सार्वजनिक व्यवस्था और सुरक्षा मानकों के अनुरूप रहते हुए जारी रह सकती हैं। कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व वाली धार्मिक प्रथाओं को सामान्यतः संरक्षण मिलना चाहिए, बशर्ते वे कानून-व्यवस्था और जनहित के दायरे में हों। इस फैसले को तमिलनाडु में मनाए जाने वाले कार्तिगै दीपम के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने इसे सनातन परंपरा की विजय बताया। उन्होंने कहा कि यह निर्णय देश की विविध धार्मिक-सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण की दिशा में सकारात्मक संकेत देता है। साथ ही, उन्होंने तमिलनाडु सरकार पर सांस्कृतिक परंपराओं के प्रति “प्रतिबंधात्मक रवैये” का आरोप लगाते हुए कहा कि परंपराओं को अनावश्यक रूप से सीमित करने के बजाय संवाद और संतुलन का मार्ग अपनाया जाना चाहिए।

धार्मिक संगठनों और भक्तों का कहना है कि यह फैसला आस्था और परंपरा—दोनों के सम्मान का उदाहरण है। उनका तर्क है कि दीपथून जैसी परंपराएँ केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा हैं, जिनका निर्वाह सदियों से होता आ रहा है। वहीं, कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय यह भी रेखांकित करता है कि धार्मिक स्वतंत्रता और नियामक आवश्यकताओं के बीच संतुलन बनाए रखना न्यायपालिका की प्राथमिकता है।

कुल मिलाकर, मद्रास उच्च न्यायालय के इस निर्णय ने कार्तिगै दीपम से जुड़ी परंपराओं को लेकर चल रही बहस को एक स्पष्ट दिशा दी है। The Economic Times के अनुसार, यह मामला आने वाले समय में धार्मिक परंपराओं और प्रशासनिक विनियमों के बीच संतुलन पर होने वाली चर्चाओं के लिए नज़ीर के रूप में देखा जा रहा है।

लेखक / Writer : अभिमन्यू 🛞
प्रकाशन / Publish By : सनातन संवाद


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