महाशिवरात्रि पर्व — 15 फ़रवरी 2026 (रविवार)
शिव–शक्ति के मिलन, साधना और आत्म-जागरण की पावन रात्रि
सनातन परंपरा में फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को आने वाली महाशिवरात्रि केवल एक पर्व नहीं, बल्कि आत्मा के भीतर शिव-तत्त्व को जाग्रत करने की रात्रि मानी जाती है। यही वह रात्रि है जब भक्त जागरण, व्रत, जप और अभिषेक के माध्यम से भगवान शिव की आराधना करते हैं और शिव–शक्ति की संयुक्त कृपा का अनुभव करते हैं। मान्यता है कि इसी तिथि पर शिव और माता पार्वती का पावन विवाह संपन्न हुआ—वैराग्य और गृहस्थी, तप और करुणा—दोनों का दिव्य संतुलन स्थापित हुआ।
🌙 महाशिवरात्रि 2026 : तिथि और व्रत
फाल्गुन कृष्ण पक्ष त्रयोदशी आरंभ: 15 फ़रवरी 2026, दोपहर 05:04 बजे
त्रयोदशी समाप्त: 16 फ़रवरी 2026, दोपहर 05:34 बजे
महाशिवरात्रि व्रत: रविवार, 15 फ़रवरी 2026
पारण: सोमवार, 16 फ़रवरी 2026
🌌 निशीथ काल पूजा (अत्यंत श्रेष्ठ समय)
15 फ़रवरी रात 11:52 बजे से 16 फ़रवरी 12:42 बजे (AM)
(लगभग 50 मिनट का विशेष काल — शिव-साधना के लिए सर्वश्रेष्ठ)
⭐ विशेष ज्योतिषीय संयोग
इस वर्ष महाशिवरात्रि श्रवण नक्षत्र और सर्वार्थ सिद्धि योग में पड़ रही है। शास्त्रों के अनुसार, इस योग में किया गया जप, तप, दान और पूजन असाधारण फल देता है। यह संयोग साधकों के लिए केवल भौतिक उन्नति ही नहीं, बल्कि आत्मिक शुद्धि और मोक्ष-पथ का दुर्लभ अवसर भी है।
🕯️ चार प्रहरों में पूजा का समय
प्रथम प्रहर: सायं 06:01 से 09:09 बजे
द्वितीय प्रहर: रात्रि 09:09 से 16 फ़रवरी 12:17 बजे (AM)
तृतीय प्रहर: 12:17 से 03:25 बजे (AM)
चतुर्थ प्रहर: 03:25 से प्रातः 06:33 बजे
पारण समय: 16 फ़रवरी 2026, प्रातः 06:33 से 03:10 बजे तक
🕉️ महाशिवरात्रि पर जप हेतु प्रमुख मंत्र
ॐ नमः शिवाय
महामृत्युंजय मंत्र
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥
ॐ हौं जूं सः मृत्युंजयाय नमः॥
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि। तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥
🛕 महाशिवरात्रि पूजा विधि (सरल और शुद्ध भाव से)
प्रातः सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करें और मन को शांत कर व्रत का संकल्प लें। शुभ समय में शिवलिंग का पंचामृत अभिषेक करें। इसके पश्चात दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल, गन्ने का रस अर्पित करें। चंदन और भस्म का तिलक लगाकर बिल्वपत्र, शमीपत्र, धतूरा, भांग, फल-फूल, मिष्ठान अर्पित करें। धूप-दीप प्रज्वलित कर रुद्राष्टक, शिव महिम्न स्तोत्र का पाठ करें या रुद्राक्ष से पंचाक्षरी मंत्र का जप करें। अंत में श्रद्धा से शिव आरती करें।
🌺 भावार्थ
महाशिवरात्रि केवल कर्मकांड की रात्रि नहीं—यह अहंकार के क्षय और चेतना के उदय की रात्रि है। इस पावन अवसर पर शिव–शक्ति के मिलन का स्मरण करते हुए अपने जीवन में संतुलन, धैर्य और करुणा को प्रतिष्ठित करें।
🔱🕉️ हर हर महादेव 🕉️🔱
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