📢 Reading karne se pehle please support kare 👇
👉 Click Hereभीष्म से महाभारत युद्ध तक कुरुवंश का पतन
कुरुवंश की परंपरा त्याग, धर्म और वीरता से समृद्ध थी, किन्तु समय के साथ इसी महान वंश में मतभेद और ईर्ष्या के बीज पनपने लगे। हस्तिनापुर में पाण्डव और कौरव एक साथ बड़े हुए, परंतु उनके स्वभाव और विचारों में बहुत अंतर था। पाण्डव सत्य, धर्म और मर्यादा का पालन करने वाले थे, जबकि दुर्योधन और उसके सहयोगी शक्ति और अधिकार को ही सर्वोच्च मानते थे। यही भिन्नता आगे चलकर महाभारत के महान युद्ध का कारण बनी।
गुरु द्रोणाचार्य के आश्रम में सभी राजकुमारों ने युद्धकला की शिक्षा प्राप्त की। अर्जुन अपनी प्रतिभा और परिश्रम के कारण गुरु द्रोण के प्रिय शिष्य बन गए। भीम अपनी असाधारण शक्ति के लिए प्रसिद्ध थे और युधिष्ठिर सत्यप्रिय और न्यायप्रिय थे। इन गुणों के कारण पाण्डव प्रजा और बुजुर्गों के प्रिय बन गए, जिससे दुर्योधन के मन में ईर्ष्या और द्वेष बढ़ता गया। उसे भय होने लगा कि भविष्य में पाण्डव ही हस्तिनापुर के शासक बनेंगे।
दुर्योधन ने कई बार पाण्डवों को समाप्त करने की योजना बनाई। एक बार उसने भीम को विष देकर गंगा में डलवा दिया, परंतु भीम बच निकले। बाद में लाक्षागृह की योजना बनाई गई, जिसमें पाण्डवों को जिंदा जलाने का प्रयास किया गया, लेकिन विदुर की चेतावनी से वे सुरक्षित निकल गए। इन घटनाओं ने स्पष्ट कर दिया कि कुरुवंश के भीतर संघर्ष गहरा होता जा रहा था।
जब पाण्डवों की पहचान प्रकट हुई तो हस्तिनापुर में पुनः उनका स्वागत किया गया। विवाद को शांत करने के लिए राज्य का विभाजन किया गया और पाण्डवों को खाण्डवप्रस्थ दिया गया। उस समय वह क्षेत्र उजाड़ और निर्जन था, किन्तु पाण्डवों ने अपने परिश्रम और कुशलता से उसे इन्द्रप्रस्थ नामक भव्य नगर में बदल दिया। युधिष्ठिर ने राजसूय यज्ञ कर अपनी प्रतिष्ठा स्थापित की और अनेक राजाओं ने उन्हें सम्राट के रूप में स्वीकार किया।
इन्द्रप्रस्थ की समृद्धि और पाण्डवों की प्रतिष्ठा देखकर दुर्योधन के मन में जलन और अधिक बढ़ गई। शकुनि ने दुर्योधन को छल का मार्ग अपनाने की सलाह दी। युधिष्ठिर को जुए के खेल में आमंत्रित किया गया। धर्मराज होने के कारण युधिष्ठिर निमंत्रण अस्वीकार नहीं कर सके। जुए के खेल में शकुनि की चालों से युधिष्ठिर अपना धन, राज्य, भाई और अंततः द्रौपदी तक हार गए।
सभा में द्रौपदी का अपमान हुआ, जिसने पूरे कुरुवंश को कलंकित कर दिया। उस समय भीष्म, द्रोण और विदुर जैसे महान पुरुष उपस्थित थे, किन्तु परिस्थितियों के कारण वे हस्तक्षेप न कर सके। अंततः धृतराष्ट्र ने भयवश द्रौपदी से क्षमा माँगी और पाण्डवों को मुक्त किया, परंतु पुनः जुए के खेल में पाण्डवों को बारह वर्ष का वनवास और एक वर्ष का अज्ञातवास स्वीकार करना पड़ा।
वनवास के समय पाण्डवों ने अनेक कठिनाइयों का सामना किया। उन्होंने तपस्या, साधना और युद्ध अभ्यास से अपनी शक्ति को और बढ़ाया। अज्ञातवास के दौरान वे मत्स्य देश में भेष बदलकर रहे और सफलतापूर्वक अपना वचन पूरा किया। वनवास समाप्त होने के बाद उन्होंने हस्तिनापुर से अपना राज्य वापस माँगा, किन्तु दुर्योधन ने सुई की नोक के बराबर भूमि देने से भी इंकार कर दिया।
युद्ध टालने के लिए श्रीकृष्ण स्वयं शांति दूत बनकर हस्तिनापुर पहुँचे। उन्होंने धृतराष्ट्र और दुर्योधन को समझाने का प्रयास किया कि युद्ध से केवल विनाश होगा, किन्तु दुर्योधन ने उनकी बात नहीं मानी। उसने श्रीकृष्ण को बंदी बनाने का भी प्रयास किया। तब श्रीकृष्ण ने अपना विराट रूप प्रकट कर दिया और यह स्पष्ट कर दिया कि धर्म की विजय निश्चित है।
अंततः कुरुक्षेत्र में महाभारत का महान युद्ध आरंभ हुआ। इस युद्ध में भारत के लगभग सभी बड़े राजाओं ने भाग लिया। अठारह दिनों तक चला यह युद्ध अत्यंत भयंकर था। असंख्य वीरों ने अपने प्राण न्योछावर कर दिए। युद्ध में भीष्म शरशय्या पर गिरे, द्रोणाचार्य मारे गए, कर्ण युद्धभूमि में वीरगति को प्राप्त हुए और अंत में भीम ने दुर्योधन का वध किया। इस प्रकार कौरवों का अंत हो गया और कुरुवंश का अधिकांश भाग नष्ट हो गया। अंततः युधिष्ठिर हस्तिनापुर के राजा बने और धर्म के अनुसार राज्य का संचालन करने लगे।
सनातन संवाद का समर्थन करें
धर्म और ज्ञान के इस प्रसार में अपना योगदान दें।
UPI ID: ssdd@kotak
Donate & Supportसनातन संवाद
"धर्मो रक्षति रक्षितः"
सनातन संस्कृति के सत्य को जन-जन तक पहुँचाने के हमारे इस पवित्र संकल्प में सहभागी बनें। आपकी छोटी सी मदत; इस ज्ञान रूपी यज्ञ को निरंतर प्रज्वलित रखने में सहायक होगी।
🛡️ सुरक्षित भुगतान द्वार (Cashfree)
सनातन संवाद सेवा
"धर्मो रक्षति रक्षितः"
📱 अब WhatsApp पर भी!
ताज़ा अपडेट्स के लिए हमसे जुड़ें।
सिर्फ एक मैसेज भेजें और हमारा नंबर 8425950132 सुरक्षित करें।
🙏 पावन सहयोग
सनातन संस्कृति के प्रचार-प्रसार हेतु अपनी श्रद्धा अनुसार सहयोग प्रदान करें। आपका योगदान हमारे संकल्प को शक्ति देगा।
सहयोग राशि प्रदान करें🛡️ सुरक्षित और गोपनीय भुगतान

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें