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👉 Click Hereकाल — समय नहीं, परिवर्तन की धारा
नमस्कार, मैं तु ना रिं, एक सनातनी।
आज मैं तुम्हें उस सत्य के पास ले चलूँ
जिससे कोई बच नहीं सकता — काल।
लोग काल को घड़ी समझते हैं,
सेकंड, मिनट, घंटे।
पर सनातन कहता है —
काल केवल समय नहीं,
परिवर्तन की शक्ति है।
काल वह है
जो हर चीज़ को बदल देता है।
जो जन्म देता है,
वही समाप्त भी करता है।
बचपन को युवावस्था में,
युवावस्था को वृद्धावस्था में,
और अंत में
मृत्यु में बदल देता है।
इसलिए सनातन में
शिव को “महाकाल” कहा गया।
क्योंकि वे समय के भी पार हैं,
और समय के स्वामी भी।
काल का सबसे बड़ा रहस्य यह है —
यह किसी के लिए रुकता नहीं।
राजा हो या साधु,
धनी हो या निर्धन,
सब काल के अधीन हैं।
इसीलिए ऋषि कहते थे —
“काल को जानो,
तो जीवन को समझ जाओगे।”
जब मनुष्य यह समझ लेता है
कि सब कुछ बदलने वाला है,
तो उसका मोह कम हो जाता है।
और जहाँ मोह कम हुआ,
वहाँ दुःख भी कम हो गया।
आज मनुष्य
हर चीज़ को स्थायी बनाना चाहता है —
रिश्ते, धन, शरीर, सफलता।
और जब वह बदलती है,
तो वह टूट जाता है।
सनातन कहता है —
बदलाव को स्वीकार करो।
यही काल का नियम है।
काल तुम्हारा शत्रु नहीं,
तुम्हारा शिक्षक है।
यह सिखाता है —
जो आज है,
वह कल नहीं रहेगा।
इसलिए
अहंकार मत पालो,
और
अवसर मत खोओ।
जो समय का सम्मान करता है,
वह जीवन का सम्मान करता है।
और जो काल को समझ गया,
उसके लिए
हर क्षण
एक साधना बन जाता है।
✍🏻 लेखक: तु ना रिं
🌿 सनातन ज्ञान श्रृंखला
सनातन संवाद
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