मंदिर परंपरा – पत्थर में उतरी हुई चेतना | सनातन संवाद मंदिर परंपरा – पत्थर में उतरी हुई चेतना हिन्दू धर्म के प्रारंभिक काल में उपासना खुली प्रकृति में होती थी — नदी तट पर, अग्नि के समक्ष, आकाश को साक्षी मानकर। उस समय धर्म का केंद्र हृदय और यज्ञवेदी थे। परंत…
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ (Atom)