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👉 Click Hereआज का पंचांग 28 दिसंबर 2025: रविवार
🌺 पंचांग 28 दिसंबर 2025, रविवार | पौष शुक्ल अष्टमी 🌺
नमस्कार, मैं तु ना रिं, एक सनातनी।
आज सनातन संवाद पर हम जानेंगे 28 दिसंबर 2025, रविवार का वैदिक पंचांग, जो हमें केवल तिथि-नक्षत्र नहीं, बल्कि समय के साथ सही जीवन-दिशा भी सिखाता है।
हिन्दू पंचांग के अनुसार यह दिन पौष मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि का है, जो प्रातः से 11:59 बजे तक रहती है। इसके पश्चात नवमी तिथि आरंभ हो जाती है। पौष शुक्ल अष्टमी को दुर्गाष्टमी व्रत का विशेष महत्व है, क्योंकि यह दिन शक्ति-साधना, संयम और आत्मबल को जाग्रत करने का अवसर देता है।
आज प्रातः उत्तरभाद्रपदा नक्षत्र 08:43 बजे तक प्रभाव में रहता है, उसके बाद रेवती नक्षत्र प्रारंभ होता है। उत्तरभाद्रपदा वैराग्य, गहन सोच और आत्मनिरीक्षण का संकेत देता है, जबकि रेवती नक्षत्र करुणा, पूर्णता और शुभ फल प्रदान करने वाला माना जाता है।
योग की बात करें तो वरीयान योग 10:13 बजे तक है, जो कार्यों में सफलता और विस्तार का संकेत देता है। इसके बाद परिघ योग आरंभ होता है, जिसमें धैर्य और संतुलन आवश्यक होता है। करणों में दिन के मध्य तक बव, फिर बालव, और रात्रि में कौलव करण प्रभावी रहता है।
आज चंद्रमा मीन राशि में पूरे दिन-रात संचार करता है। मीन राशि का चंद्र मन को आध्यात्मिक, भावुक और करुणामय बनाता है। ध्यान, जप, सेवा और आत्मचिंतन के लिए यह स्थिति अत्यंत शुभ मानी जाती है। वहीं सूर्य धनु राशि में स्थित है, जो धर्म, सत्य और ज्ञान के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
सूर्योदय 07:11 बजे और सूर्यास्त 05:45 बजे होता है। चंद्रोदय 12:30 बजे तथा चंद्रास्त 01:26 बजे (अगले दिन) है। ऋतु के अनुसार द्रिक गणना से शिशिर ऋतु और वैदिक परंपरा में हेमंत ऋतु का प्रभाव है।
शुभ कार्यों के लिए अभिजीत मुहूर्त 12:07 से 12:49 बजे तक श्रेष्ठ माना गया है। प्रातः ब्रह्म मुहूर्त और अमृत काल साधना, मंत्र-जप और पूजा के लिए उत्तम समय है।
वहीं राहुकाल 04:26 से 05:45 बजे, यमगण्ड 12:28 से 01:47 बजे और गुलिक काल 03:07 से 04:26 बजे तक शुभ कार्यों से बचना चाहिए।
आज सर्वार्थसिद्धि योग भी बन रहा है 07:11 से 08:43 बजे तक, जो किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है।
चंद्रबल जिन राशियों को प्राप्त है—वृषभ, मिथुन, कन्या, तुला, मकर और मीन—उनके लिए आज का दिन मानसिक स्थिरता और सही निर्णय देने वाला है।
सनातन धर्म हमें सिखाता है कि पंचांग केवल दिन बताने का साधन नहीं, बल्कि जीवन को समय के साथ सामंजस्य में जीने की कला है। जब हम काल का सम्मान करते हैं, तब काल स्वयं हमारा मार्ग प्रशस्त करता है।
— 🔱 सनातन संवाद 🔱
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