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धर्म सही साबित करने के लिए नहीं, बदलने के लिए होता है

धर्म सही साबित करने के लिए नहीं, बदलने के लिए होता है

धर्म सही साबित करने के लिए नहीं, बदलने के लिए होता है

A person looking into a mystical mirror that reflects their inner spiritual self instead of their physical appearance

नमस्कार, मैं तु ना रिं, एक सनातनी।

आज का हिंदू यह चाहता है कि धर्म उसे सही साबित करे, पर यह नहीं चाहता कि धर्म उसे बदले।

हम शास्त्रों से उद्धरण ढूँढते हैं अपनी बात सही ठहराने के लिए, लेकिन शास्त्रों की शिक्षा अपने जीवन में उतारने से कतराते हैं।

हमें वे बातें पसंद आती हैं जो हमारी सुविधा के अनुकूल हों, और जो बातें अहंकार तोड़ें, आदतें बदलें और जिम्मेदारी बढ़ाएँ, उन्हें अव्यावहारिक कहकर छोड़ देते हैं।

कड़वी सच्चाई यह है कि धर्म समर्थन देने नहीं आता, धर्म सुधार करने आता है।

अगर धर्म हमें असहज नहीं कर रहा, हमें झुका नहीं रहा और हमें बेहतर नहीं बना रहा, तो हमने धर्म को नहीं अपनाया, हमने उसे अपने हिसाब से मोड़ लिया है।

सनातन आईना है, ताली नहीं। वह दिखाता है कि हम क्या हैं, न कि हम क्या दिखाना चाहते हैं।

जय सनातन 🔱

आईने से भागो मत, उसे स्वीकारो। यही सच्ची साधना है।

लेखक / Writer : अग्नीपुत्र 🔥
प्रकाशन / Publish By : सनातन संवाद


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