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धर्म बनाम अहंकार: क्या आप भगवान को अपनी गलतियों का साझीदार बना रहे हैं?

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धर्म पक्ष नहीं लेता, सत्य लेता है

A person looking into a mirror and seeing their reflection through the light of a Diya, symbolizing self-reflection and truth in Dharma

आज का हिंदू यह मान बैठा है कि धर्म उसका पक्ष लेगा, चाहे वह गलत ही क्यों न हो।

वह सोचता है कि मैं सही हूँ क्योंकि मैं धार्मिक हूँ। लेकिन यह पूछने की हिम्मत नहीं करता कि मैं धार्मिक हूँ, इसलिए क्या मेरा आचरण भी सही है।

हम अपने पक्ष में भगवान को खड़ा कर लेते हैं, लेकिन अपने भीतर गलतियों को खड़ा रहने देते हैं।

कड़वी सच्चाई यह है कि सनातन किसी का पक्ष नहीं लेता, वह सत्य का पक्ष लेता है।

जहाँ सत्य है, वहीं धर्म है। और जहाँ हमारा अहंकार है, वहाँ धर्म चुपचाप पीछे हट जाता है।

अगर हम यह सोचते हैं कि भगवान हमारी गलती पर भी मुहर लगा देंगे, तो हम भगवान को नहीं, अपने अहंकार को पूज रहे हैं।

जय सनातन 🔱

धर्म को ढाल मत बनाओ, धर्म को दिशा बनाओ। यही सनातन का सत्य है।

लेखक / Writer : अग्नीपुत्र 🔥
प्रकाशन / Publish By : सनातन संवाद


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