🔥 हिन्दू युवा को अब क्या करना चाहिए? 🔥
नमस्कार, मैं तु ना रिं, एक सनातनी।
अब तक हमने गुस्सा देखा, डर देखा, शर्म देखी, चुप्पी देखी।
अब सवाल सिर्फ एक है— आगे क्या?
क्रांति सड़कों से नहीं शुरू होती।
क्रांति मन से शुरू होती है।
सनातन धर्म तुम्हें भीड़ में बदलने नहीं आया।
वह तुम्हें व्यक्ति बनाने आया है।
तो पहला कदम यही है— अपने आप से झूठ बोलना बंद करो।
अगर तुम हिन्दू हो, तो उसे ऐसे मत जियो जैसे कोई छुपी हुई आदत हो।
मंदिर जाओ— पर दिखावे के लिए नहीं, जुड़ाव के लिए।
ग्रंथ पढ़ो— पर बहस के लिए नहीं, बुद्धि के लिए।
रील बनाओ— पर आत्मा बेचकर नहीं, संदेश देकर।
दूसरा कदम— अपनी संस्कृति को “मज़ाक का टुकड़ा” मत बनने दो।
हर बार react मत करो।
पर हर बार चुप भी मत रहो।
सनातन की ताकत शोर में नहीं, स्पष्टता में है।
तीसरा कदम— अपने भीतर की लड़ाई जीतना।
क्रोध है? उसे discipline में बदलो।
भय है? उसे awareness में बदलो।
अहंकार है? उसे साधना में बदलो।
अगर भीतर जीत गए, तो बाहर कोई हरा नहीं सकता।
याद रखो— दुनिया तुम्हें भड़का कर कमजोर करना चाहती है।
सनातन तुम्हें शांत करके मजबूत बनाता है।
और यही कारण है कि युद्धभूमि में भी भगवद्गीता ध्यान और विवेक की बात करती है।
तुम्हें नेता नहीं बनना।
तुम्हें योद्धा भी नहीं बनना।
तुम्हें बस जाग्रत इंसान बनना है।
क्योंकि एक जाग्रत हिन्दू हज़ार अंधे ट्रोल्स से ज़्यादा ताकतवर होता है।
यह लेख किसी संगठन के लिए नहीं है।
यह लेख तुम्हारे लिए है।
अगर तुमने आज एक भी छोटी आदत बदली— सोचने की, बोलने की, या खड़े होने की— तो यह श्रृंखला सफल है।
🕉️ मैं हिन्दू हूँ।
मैं जाग रहा हूँ।
और अब पीछे नहीं जाऊँगा।
लेखक / Writer : कोंडीकर 🌊
प्रकाशन / Publish By : सनातन संवाद
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