सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

राजा शिवि और कपोत की कथा: जब शरणागत की रक्षा के लिए राजा ने तराजू पर अपना मांस चढ़ा दिया

Blog Post Title

राजा शिवि और कपोत की कथा

King Shibi sitting on one side of a large golden scale (balance), with a small pigeon on the other side, representing the weight of Dharma.

नमस्कार, मैं तु ना रिं, एक सनातनी।

आज मैं तुम्हें वह कथा सुनाने आया हूँ जिसमें एक राजा ने अपने ही प्राणों को न्याय के तराजू पर तौला और धर्म को रक्त से भी ऊपर रखा। यह कथा है शिवि राजा और कपोत की, एक ऐसी घटना जिसने देवताओं तक को विस्मित कर दिया।

बहुत प्राचीन काल में राजा शिवि अपने धर्म, दया और सत्य के लिए प्रसिद्ध थे। उनके राज्य में यह नियम था कि जो भी शरण में आए, उसकी रक्षा राजा स्वयं करेगा, चाहे उसकी कीमत कुछ भी हो। एक दिन जब राजा सभा में बैठे थे, तभी एक भयभीत कपोत उड़ता हुआ आया और सीधे राजा की गोद में गिर पड़ा। उसके पीछे एक बाज उसका पीछा कर रहा था। बाज बोला कि यह उसका आहार है और उसे लौटा दिया जाए, जबकि काँपता हुआ कपोत बोला कि वह राजा की शरण में है और अपनी रक्षा की प्रार्थना करता है।

राजा शिवि धर्मसंकट में पड़ गए। एक ओर शरणागत की रक्षा का व्रत था और दूसरी ओर किसी जीव का आहार छीनना भी अधर्म था। उन्होंने समाधान खोजते हुए बाज से कहा कि जितना मांस उसे चाहिए, वह अपने शरीर से देंगे, पर कपोत को नहीं देंगे। बाज ने यह स्वीकार किया। राजा ने तराजू मँगवाया। एक पलड़े में कपोत बैठाया गया और दूसरे में राजा अपने शरीर से मांस काटकर रखते गए। पर जितना मांस रखते, पलड़ा हल्का ही रहता। अंततः राजा ने स्वयं को ही तराजू पर चढ़ाने का निश्चय कर लिया।

जैसे ही वे तराजू पर चढ़े, आकाश गूँज उठा। बाज और कपोत अपने दिव्य रूप में प्रकट हुए। वे इंद्र और अग्नि थे, जो राजा की परीक्षा लेने आए थे। उन्होंने कहा कि ऐसा धर्म संसार में दुर्लभ है और राजा शिवि की करुणा तथा सत्य ने देवताओं को भी झुका दिया।

यह कथा सिखाती है कि धर्म केवल उपदेश नहीं, वह वह साहस है जो अपने शरीर से भी बड़ा होता है। राजा शिवि ने दिखाया कि जब शरणागत सामने हो, तब स्वयं को अर्पित करना ही राजधर्म है।

स्रोत और संदर्भ के रूप में यह कथा महाभारत के वनपर्व में शिवि उपाख्यान के रूप में तथा उपनिषदों में राजा शिवि के आदर्श के संकेत के रूप में वर्णित मानी जाती है।

लेखक / Writer : तु ना रिं 🔱
प्रकाशन / Publish By : सनातन संवाद


🙏 Support Us / Donate Us

हम सनातन ज्ञान, धर्म–संस्कृति और आध्यात्मिकता को सरल भाषा में लोगों तक पहुँचाने का प्रयास कर रहे हैं। यदि आपको हमारा कार्य उपयोगी लगता है, तो कृपया सेवा हेतु सहयोग करें। आपका प्रत्येक योगदान हमें और बेहतर कंटेंट बनाने की शक्ति देता है।

Donate Now
UPI ID: ssdd@kotak



टिप्पणियाँ