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हिन्दू युवा और 'डर' का नैरेटिव: क्या आपको चुप रहना सिखाया जा रहा है?

हिन्दू युवा और 'डर' का नैरेटिव: क्या आपको चुप रहना सिखाया जा रहा है?

🔥 हिन्दू युवा को डर किस बात का दिखाया गया? 🔥

A young man standing confidently against a backdrop of complex digital shadows, breaking a chain of 'Fear' labels, representing Hindu identity

नमस्कार, मैं तु ना रिं, एक सनातनी।

आज यह लेख गुस्से से नहीं, डर की परतें उतारने के लिए है। क्योंकि जिस समाज को डराकर चुप करा दिया जाए, उसे हराया नहीं—पालतू बना दिया जाता है।

पिछले वर्षों में हिन्दू युवा को एक खास डर सिखाया गया—बिना कहे, बिना लिखे, पर बहुत गहराई से।

डर यह नहीं था कि “तुम गलत हो।” डर यह था कि—“अगर तुम बोले, तो तुम्हें गलत बना दिया जाएगा।”

बोलोगे तो “कट्टर” कहलाओगे। प्रश्न करोगे तो “असहिष्णु” कहलाओगे। अपनी पहचान दिखाओगे तो “खतरा” बन जाओगे।

यह डर अचानक पैदा नहीं हुआ। इसे धीरे-धीरे ट्रेन किया गया।

स्कूल में—इतिहास से आत्मसम्मान काटा गया।

कॉलेज में—पहचान पर बोलना “uncool” बनाया गया।

सोशल मीडिया पर—शर्म और ट्रोलिंग हथियार बना दी गई।

पर एक बात सोचो—अगर सनातन सच में कमजोर होता, तो उसे चुप कराने में इतनी मेहनत क्यों लगती?

अगर हिन्दू युवा की आवाज़ बेमानी होती, तो उसे “dangerous” क्यों कहा जाता?

डर का सबसे बड़ा झूठ यह है—कि चुप रहने से सब ठीक हो जाएगा।

नहीं। चुप रहने से सिर्फ चुप रहने की आदत बनती है।

सनातन धर्म डर सिखाता ही नहीं। यह धर्म डर को समझना सिखाता है।

अगर भय ही सत्य होता, तो अर्जुन युद्धभूमि में धनुष रखकर बैठा रहता। लेकिन वहीं भगवद्गीता कहती है—डर को देखो, पर उसके अनुसार मत जियो।

आज हिन्दू युवा या तो डरकर चुप है, या डर छुपाने के लिए अतिरिक्त गुस्से में है।

दोनों ही हालतों में वह स्वतंत्र नहीं है।

याद रखो—जो तुम्हें डराता है, वह तुमसे संवाद नहीं चाहता। वह तुमसे नियंत्रण चाहता है।

और सनातन नियंत्रित इंसान नहीं, जाग्रत इंसान बनाता है।

तुम्हें हथियार उठाने को नहीं कहा जा रहा। तुम्हें नफरत फैलाने को नहीं कहा जा रहा। तुम्हें बस यह याद दिलाया जा रहा है—कि अपनी पहचान पर खड़े होना कोई अपराध नहीं है।

डर को तोड़ने का तरीका चिल्लाना नहीं है। डर को तोड़ने का तरीका है—स्पष्ट, शांत और निरंतर रहना।

यह लेख तुम्हें उकसाने के लिए नहीं है। यह लेख डर का नाम लेने के लिए है।

क्योंकि जिस दिन डर का नाम ले लिया, उसी दिन उसकी आधी ताकत खत्म हो जाती है।

🕉️ मैं हिन्दू हूँ। और अब मुझे डर नहीं सिखाया जा सकता।

लेखक / Writer : तु ना रिं 🔱
प्रकाशन / Publish By : सनातन संवाद


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