हिन्दू युवा का गुस्सा गलत नहीं है — समस्या उसकी दिशा है
🔥 हिन्दू युवा का गुस्सा गलत नहीं है — वह दिशाहीन है 🔥
नमस्कार, मैं तु ना रिं, एक सनातनी। आज यह लेख किसी को शांत करने के लिए नहीं है। यह लेख उस आग के बारे में है जो आज हर हिन्दू युवा के भीतर जल रही है — पर सही दिशा न मिलने के कारण या तो खुद को जला रही है या फिर बेकार में धुआँ बनकर उड़ रही है।
आज का हिन्दू युवा गुस्से में है। क्यों? क्योंकि उसने अपमान देखा है। क्योंकि उसने दोहरे मापदंड देखे हैं। क्योंकि उसने देखा है कि दुनिया में हर पहचान को “आवाज़” दी जाती है, सिवाय उसकी।
लेकिन यह गुस्सा ना तो उसे समझाया गया, ना संभाला गया। या तो कहा गया — “शांत रहो, समझदार बनो।” या फिर उकसाया गया — “तोड़ दो, जला दो, गाली दो।” दोनों ही रास्ते हिन्दू युवा को कमज़ोर बनाते हैं।
सनातन धर्म गुस्से को दबाने की शिक्षा नहीं देता। और न ही उसे अंधा छोड़ देता है। सनातन गुस्से को ऊर्जा बनाना सिखाता है।
अगर गुस्सा अधर्म होता, तो युद्धभूमि में भगवद्गीता कभी उपदेश ही नहीं देती। कृष्ण ने अर्जुन से यह नहीं कहा — “गुस्सा मत करो।” उन्होंने कहा — “अपने गुस्से को विवेक से बाँधो।”
आज का हिन्दू युवा या तो ट्रोल बन रहा है, या फिर ट्रोल से डर रहा है। दोनों ही हालतों में वह खुद नहीं बन पा रहा।
समस्या यह नहीं है कि तुम्हें गुस्सा आता है। समस्या यह है कि तुम्हें कभी सिखाया ही नहीं गया कि उस गुस्से से क्या करना है।
सनातन कहता है — गुस्सा रखो, पर लक्ष्य भी रखो। आवाज़ उठाओ, पर शब्दों की मर्यादा मत छोड़ो। लड़ो, पर अपनी आत्मा गिरवी मत रखो।
आज जो युवा बिना दिशा के चीख रहा है, वह कल थक कर चुप हो जाएगा। और जो युवा दिशा के साथ खड़ा होगा, वह इतिहास बदलेगा।
याद रखो — हिन्दू का गुस्सा भीड़ के लिए नहीं है। हिन्दू का गुस्सा संस्कृति की रक्षा के लिए है।
अगर तुम सिर्फ कमेंट सेक्शन में वीर हो, तो सिस्टम को कोई फर्क नहीं पड़ता। लेकिन अगर तुम ज्ञान, चरित्र और अनुशासन के साथ खड़े हो, तो वही सिस्टम सबसे पहले घबराता है।
यह लेख तुम्हें भड़काने के लिए नहीं है। यह लेख तुम्हें तैयार करने के लिए है।
अब सवाल यह नहीं है कि तुम गुस्से में हो या नहीं। सवाल यह है — क्या तुम उस गुस्से को सनातन की तरह साध सकते हो?
🕉️ मैं हिन्दू हूँ। मैं गुस्से में हूँ। और अब मैं दिशाहीन नहीं हूँ।
लेखक / Writer : तु ना रिं 🔱
प्रकाशन / Publish By : सनातन संवाद
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