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मैं किसी दिखावे की नहीं, गीता की शपथ लेकर कहता हूँ— मेरे लिए हिंदुत्व कोई तात्कालिक भावना नहीं, यह मेरी पहचान, मेरा आत्मगौरव और मेरी चेतना की जड़ है। यह नारा नहीं, यह जीवनभर का व्रत है।
मैं आज नहीं, हर काल में हिंदू था, हूँ और रहूँगा। परिस्थितियाँ बदल सकती हैं, युग बदल सकते हैं, लेकिन जो व्यक्ति धर्म से जुड़ा होता है वह कभी परिस्थितियों का दास नहीं बनता।
मेरा यह पक्ष किसी भय से नहीं, किसी स्वार्थ या सौदेबाज़ी से नहीं— यह विश्वास से जन्मा है, यह उस विरासत से आया है जो रक्त में बहती है। मेरे लिए हिंदू होना शक्ति है, उत्तरदायित्व है और आत्मसम्मान की सबसे ऊँची अवस्था है।
आज समय मौन का नहीं है। आज समय है एकजुट होने का, सच बोलने का और सीना तानकर खड़े होने का। क्योंकि जब हिंदू जागता है, तो इतिहास केवल लिखा नहीं जाता— इतिहास दिशा बदलता है।
जो इस विचार के साथ खड़ा है, जो इस संकल्प को जीता है, वह पूरे स्वाभिमान और निडर विश्वास के साथ अपनी आवाज़ उठाए और कहे—
‼️ जय श्री राम ‼️ 🚩🚩
लेखक / Writer : तु ना रिं 🔱
प्रकाशन / Publish By : सनातन संवाद
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