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मैं गर्व से कहता हूँ — मैं हिन्दू हूँ, क्योंकि मेरा धर्म मौन की शक्ति समझाता है

मैं गर्व से कहता हूँ — मैं हिन्दू हूँ, क्योंकि मेरा धर्म मौन की शक्ति समझाता है

मैं गर्व से कहता हूँ — मैं हिन्दू हूँ, क्योंकि मेरा धर्म मौन की शक्ति समझाता है

Hindu sage practicing maun sadhana showing power of silence in Sanatan Dharma

मैं गर्व से कहता हूँ — मैं हिन्दू हूँ, क्योंकि मेरा धर्म मौन की शक्ति समझाता है

नमस्कार, मैं तु ना रिं, एक सनातनी।
आज मैं आपको सनातन धर्म की उस गहरी और शांत शिक्षा के बारे में बताने आया हूँ जिसे आज की शोरभरी दुनिया लगभग भूल चुकी है—मौन।

सनातन धर्म कहता है कि हर बात बोलना ज़रूरी नहीं, कभी-कभी चुप रहना सबसे सही उत्तर होता है। मौन का मतलब डरना नहीं, मौन का मतलब है— अपने मन को सुनना।

जब हम लगातार बोलते रहते हैं, तो मन बिखरा रहता है। लेकिन जब हम थोड़ी देर मौन में बैठते हैं, तो भीतर की आवाज़ साफ़ सुनाई देती है। यही कारण है कि हमारे ऋषि-मुनि लंबे समय तक मौन रखते थे— ताकि सत्य को महसूस कर सकें।

सनातन धर्म यह सिखाता है कि शब्द बाहर की दुनिया बदलते हैं, लेकिन मौन भीतर की दुनिया बदल देता है। क्रोध में बोले गए शब्द रिश्ते तोड़ देते हैं, और मौन में ली गई साँस रिश्ते बचा लेती है।

आज लोग जल्दी जवाब देना बुद्धिमानी समझते हैं, लेकिन सनातन कहता है— पहले शांत हो जाओ, फिर बोलो। क्योंकि शांत मन से निकला शब्द हमेशा सही दिशा में जाता है।

मैं तु ना रिं आपसे यही कहना चाहता हूँ— रोज़ थोड़ा सा समय बिना मोबाइल, बिना शोर, बस अपने साथ बिताइए। ना कुछ बोलिए, ना कुछ साबित कीजिए। बस साँसों को महसूस कीजिए। यही छोटा-सा मौन जीवन में बड़ी शांति ला सकता है।

और इसी कारण मैं पूरे गर्व से कहता हूँ— “हाँ, मैं हिन्दू हूँ, क्योंकि मेरा धर्म मुझे सिखाता है कि मौन भी एक महान साधना है।”

लेखक / Writer : तु ना रिं 🔱
प्रकाशन / Publish By : सनातन संवाद


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