धर्म का सबसे बड़ा शत्रु — अनदेखी
आज का हिंदू यह भूल गया है कि धर्म का सबसे बड़ा शत्रु अधर्म नहीं, अनदेखी है।
न विरोध, न अपमान, न आक्रमण — सनातन को सबसे ज़्यादा नुकसान उपेक्षा से होता है।
हम कहते हैं — अभी समय नहीं है, बाद में सीख लेंगे, जब फुर्सत मिलेगी तब। और इसी “बाद में” में संस्कार छूट जाते हैं, अध्ययन रुक जाता है, और धर्म धीरे-धीरे जीवन के हाशिये पर चला जाता है।
कड़वी सच्चाई यह है कि जिसे रोज़ जिया नहीं जाता, वह एक दिन भुला दिया जाता है।
सनातन को किसी विशेष दिन की आवश्यकता नहीं है। वह रोज़ का साहचर्य चाहता है — रोज़ की स्मृति, रोज़ का अभ्यास, रोज़ की सजगता।
धर्म अगर प्राथमिकता नहीं है, तो वह केवल परंपरा बनकर रह जाएगा, मार्गदर्शन नहीं बनेगा।
जय सनातन। टालो मत, आज से जियो — यही सनातन का मौन उपदेश है।
लेखक / Writer : अग्नीपुत्र 🔥
प्रकाशन / Publish By : सनातन संवाद
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