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परंपरा बनाम परिवर्तन: क्या आप धर्म को जी रहे हैं या सिर्फ दोहरा रहे हैं?

परंपरा बनाम परिवर्तन: क्या आप धर्म को जी रहे हैं या सिर्फ दोहरा रहे हैं?

रस्मों की कैद नहीं, चेतना की उड़ान है सनातन: जानिए क्यों बिना बदलाव के परंपरा एक बोझ है।

A person breaking the chains of empty rituals to step into a vast field of golden light, symbolizing conscious spiritual freedom

आज का हिंदू यह समझ बैठा है कि धर्म का मतलब केवल परंपरा निभाना है, आदतें बदलना नहीं।

हम वही करते हैं जो घर में होता आया, जो समाज करता है, जो सब करते हैं बिना यह सोचे कि यह हमें बेहतर मनुष्य बना रहा है या नहीं।

कड़वी सच्चाई यह है परंपरा बिना समझ के बोझ बन जाती है, और धर्म बिना परिवर्तन के दिखावा।

सनातन रस्मों की कैद नहीं, वह चेतना की उड़ान है। वह हमें पूछने को कहता है क्या तुम आज कल से बेहतर हो।

अगर हमारा धर्म हमें अधिक सजग, अधिक सत्यवादी और अधिक करुणामय नहीं बना रहा, तो हम उसे सिर्फ़ दोहरा रहे हैं, जी नहीं रहे।

जय सनातन 🔱

दोहराओ मत, जीओ यही सनातन का प्राण है।

लेखक / Writer : अग्नीपुत्र 🔥
प्रकाशन / Publish By : सनातन संवाद


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