🔥 हिन्दू होना आज ‘Uncool’ कैसे बना दिया गया? 🔥
नमस्कार, मैं तु ना रिं, एक सनातनी।
आज यह लेख तुम्हें चुभेगा। क्योंकि यह उस programming पर है जिसने तुम्हारे दिमाग में धीरे-धीरे यह भर दिया कि हिन्दू होना cool नहीं है।
सोचो। कूल कौन है? जो अपनी जड़ों का मज़ाक उड़ाए। जो संस्कार को “cringe” कहे। जो अपनी भाषा, देवी-देवता, परंपरा पर ironic smile दे।
और uncool कौन है? जो कह दे कि हाँ, मैं मंदिर जाता हूँ। हाँ, मुझे अपनी परंपरा पर गर्व है। हाँ, मैं हिन्दू हूँ।
यह संयोग नहीं है। यह carefully designed narrative है।
तुम्हें सिखाया गया कि English बोलो तो smart लगोगे। Roots की बात करो तो backward लगोगे। Westernize हो जाओ तो modern कहलाओ। Sanatan की बात करो तो uncool बन जाओ।
पर ज़रा ईमानदारी से पूछो कि जिसे तुम cool समझ रहे हो, क्या वह सच में confident है या सिर्फ validation का भूखा है।
सनातन धर्म validation नहीं सिखाता। वह स्वाभिमान सिखाता है।
और यही बात आज की attention-economy को सबसे ज़्यादा परेशान करती है। क्योंकि जो व्यक्ति अपने भीतर से संतुष्ट हो, उसे बेचना मुश्किल होता है।
इसलिए हिन्दू को uncool बनाना ज़रूरी था।
अगर हिन्दू cool होता, तो युवा अपनी जड़ों से जुड़ता। अगर युवा जुड़ता, तो वह सवाल करता। और सवाल करने वाला युवा कभी आसानी से नियंत्रित नहीं होता।
याद रखो कि uncool का मतलब गलत नहीं होता। अक्सर uncool वही होता है जो भीड़ से अलग होता है।
एक समय था जब सच बोलना uncool था। एक समय था जब गुलामी स्वीकार न करना uncool था। और आज अपनी संस्कृति पर खड़े होना uncool बना दिया गया है।
अगर सनातन outdated होता, तो वह आज भी मानव मन की हर समस्या का समाधान न देता। अगर यह धर्म कमजोर होता, तो भगवद्गीता आज भी कॉलेज के युवाओं के भीतर युद्ध लड़ने की हिम्मत न जगाती।
सच यह है कि हिन्दू को uncool नहीं बनाया गया। हिन्दू को खुद से दूर किया गया।
और जो युवा आज अपनी पहचान को uncool समझ रहा है, वही युवा कल खालीपन से जूझेगा। क्योंकि ट्रेंड बदलते हैं। रील खत्म हो जाती है। तालियाँ चुप हो जाती हैं। पर जड़ हमेशा साथ रहती है।
यह लेख तुम्हें rebel बनाने के लिए नहीं है। यह लेख तुम्हें अपने आप से मिलाने के लिए है।
🕉️ मैं हिन्दू हूँ। अगर यह uncool है, तो मुझे uncool ही रहने दो।
लेखक / Writer : कोंडीकर 🌊
प्रकाशन / Publish By : सनातन संवाद
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