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गणेश जी की मूर्ति लगाने का सही स्थान और महत्व | Sanatan Sanvad

🕉️ गणेश जी की मूर्ति लगाने का सही स्थान और महत्व

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सनातन धर्म में भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और मंगलकर्ता कहा गया है, इसलिए घर या कार्यस्थल पर उनकी मूर्ति स्थापित करना अत्यंत शुभ माना जाता है। भगवान गणेश की मूर्ति का सही स्थान केवल वास्तु का विषय नहीं, बल्कि घर के वातावरण, मानसिक शांति और कार्यों की सफलता से भी जुड़ा माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार जब गणेश जी को उचित दिशा और पवित्र स्थान पर स्थापित किया जाता है, तब उनकी कृपा अधिक प्रभावी रूप से अनुभव की जाती है।

घर में गणेश जी की मूर्ति के लिए ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) को सबसे श्रेष्ठ माना गया है। यह दिशा आध्यात्मिक ऊर्जा की दिशा कही जाती है और यहां स्थापित गणेश प्रतिमा घर में सकारात्मकता, शांति और संतुलन लाती है। यदि पूजा कक्ष अलग न हो, तो घर के किसी शांत और स्वच्छ कोने में, जहां नियमित पूजा संभव हो, वहां मूर्ति स्थापित की जा सकती है। मूर्ति इस प्रकार रखी जानी चाहिए कि पूजा करते समय व्यक्ति का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रहे, जिससे मन एकाग्र रहता है।

कार्यस्थल या कार्यालय में गणेश जी की मूर्ति लगाने का भी विशेष महत्व माना जाता है। व्यापार या करियर में स्थिरता और बाधा-निवारण के लिए डेस्क पर गणेश जी की बैठी हुई शांत मुद्रा वाली छोटी प्रतिमा रखना शुभ माना जाता है। यह निर्णय क्षमता, धैर्य और कार्य-कुशलता को बढ़ाने का प्रतीक मानी जाती है। ध्यान रखना चाहिए कि मूर्ति कंप्यूटर के पीछे, फर्श पर या अव्यवस्थित स्थान पर न रखी जाए, क्योंकि इससे पूजा का भाव कमजोर होता है।

मूर्ति की दिशा भी महत्वपूर्ण मानी जाती है। गणेश जी की मूर्ति का मुख प्रायः उत्तर या पूर्व दिशा की ओर होना शुभ माना गया है। दक्षिण दिशा की ओर मुख वाली मूर्ति घर में स्थापित करने से सामान्यतः बचने की सलाह दी जाती है। साथ ही, खंडित या टूटी हुई मूर्ति कभी भी घर या कार्यालय में नहीं रखनी चाहिए, क्योंकि इसे अशुभ माना गया है। घर के लिए बहुत बड़ी मूर्ति भी उपयुक्त नहीं मानी जाती; मध्यम या छोटी प्रतिमा ही श्रेष्ठ कही गई है।

गणेश जी की मूर्ति लगाने का आध्यात्मिक महत्व यह है

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