नमस्कार, मैं तु ना रिं, एक सनातनी। आज मैं उस सत्य को स्पष्ट करने आया हूँ जिसे समझे बिना धर्म अपना सबसे बड़ा प्रयोजन खो देता है — धर्म का उद्देश्य है भयमुक्त समाज। यदि धर्म भय पैदा करे, डर सिखाए, या मनुष्य को मनुष्य से डरने की आदत डाले, तो वह अपने ही मूल से कट जाता है। धर्म का जन्म भय …
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