मैं गर्व से कहता हूँ मैं हिन्दू हूँ क्योंकि मेरा धर्म मुझे स्वयं से युद्ध करना सिखाता है
नमस्कार, मैं तु ना रिं, एक सनातनी।
आज मैं आपको सनातन धर्म की एक ऐसी गहरी बात बताना चाहता हूँ जो जीवन का सबसे बड़ा युद्ध सिखाती है खुद से जीतने का युद्ध।
दुनिया हमें सिखाती है कि दूसरों को हराओ, आगे निकलो, दिखाओ कि तुम सबसे मजबूत हो। लेकिन सनातन धर्म बिल्कुल अलग बात कहता है सबसे बड़ा शत्रु बाहर नहीं, भीतर होता है।
हमारे भीतर क्रोध है, लोभ है, ईर्ष्या है, अहंकार है, डर है। ये सब वही राक्षस हैं जिनसे लड़ना सबसे कठिन होता है और सनातन धर्म हमें यही युद्ध लड़ना सिखाता है।
महाभारत का युद्ध केवल दो सेनाओं का नहीं था, वह हर मनुष्य के भीतर चलने वाले संघर्ष का प्रतीक है। कुरुक्षेत्र बाहर था, पर असली कुरुक्षेत्र हर मनुष्य के मन में है।
जब हम अपने क्रोध पर काबू पाते हैं, तो हम जीतते हैं। जब हम लालच छोड़ते हैं, तो हम जीतते हैं। जब हम अहंकार को झुकाते हैं, तो हम जीतते हैं। यही असली विजय है।
मैं तु ना रिं आपसे यही कहना चाहता हूँ कि अगर आप अपने मन को थोड़ा थोड़ा जीतते जाएँ, तो दुनिया खुद आपके कदमों में आ जाएगी। क्योंकि जो खुद को जीत लेता है, वह सब कुछ जीत लेता है।
और इसी गहरी सीख के कारण मैं पूरे गर्व से कहता हूँ हाँ मैं हिन्दू हूँ क्योंकि मेरा धर्म मुझे दूसरों से नहीं, खुद से लड़ना सिखाता है।
लेखक / Writer : तु ना रिं 🔱
प्रकाशन / Publish By : सनातन संवाद
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