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धर्म आदत नहीं — आत्मा का अनुशासन है

धर्म आदत नहीं — आत्मा का अनुशासन है

धर्म आदत नहीं — आत्मा का अनुशासन है

Hindu dharma as daily inner discipline not ritual habit in modern life

आज का हिंदू धर्म को आस्था से ज़्यादा आदत बना चुका है।

त्योहार आते हैं तो पूजा होती है, मंदिर दिखता है तो सिर झुक जाता है, मुसीबत आती है तो भगवान याद आते हैं — और फिर सब कुछ पहले जैसा चलने लगता है।

धर्म अगर सिर्फ़ तारीख़ों, रस्मों और संकटों तक सीमित रह जाए, तो वह जीवन नहीं बदलता — सिर्फ़ दिलासा देता है।

कड़वी सच्चाई यह है — आदतें सुविधा से चलती हैं, धर्म संकल्प से।

सनातन रोज़ याद करने की चीज़ है, साल में कुछ बार निभाने की नहीं। वह हर निर्णय में मौन मार्गदर्शक बनकर खड़ा रहता है।

अगर धर्म हमारे दैनिक जीवन का हिस्सा नहीं है, तो हम धर्म को नहीं जी रहे — हम उसे टाल रहे हैं।

जय सनातन 🔱
धर्म आदत नहीं, आत्मा का अनुशासन है।

लेखक / Writer : अग्नीपुत्र 🔥
प्रकाशन / Publish By : सनातन संवाद


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