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गर्व से कहो मैं हिन्दू हूँ: क्यों अनुशासन ही सच्ची स्वतंत्रता है? | सनातन जीवन शैली

गर्व से कहो मैं हिन्दू हूँ: क्यों अनुशासन ही सच्ची स्वतंत्रता है? | सनातन जीवन शैली

मैं गर्व से कहता हूँ मैं हिन्दू हूँ, क्योंकि मेरा धर्म मुझे अनुशासन में स्वतंत्रता सिखाता है

A serene image of a sunrise with a symbolic representation of a balanced life through a meditative pose and a structured path

नमस्कार, मैं तु ना रिं, एक सनातनी।

आज मैं आपको सनातन धर्म की उस बात को आसान शब्दों में समझाना चाहता हूँ जिसे लोग अक्सर बोझ समझ लेते हैं। अनुशासन।

बहुत लोग सोचते हैं कि अनुशासन मतलब बंधन, नियमों में जकड़ जाना और खुद की आज़ादी खो देना। लेकिन सनातन धर्म ऐसा नहीं कहता। यह कहता है कि अनुशासन वही है जो जीवन को हल्का और स्पष्ट बना दे।

हमारे यहाँ उठने का समय, खाने का समय, काम का समय और आराम का समय संतुलन के साथ बताया गया है। क्योंकि जब जीवन में एक लय आ जाती है, तो मन भटकता नहीं।

अनुशासन का मतलब खुद को सज़ा देना नहीं होता, बल्कि खुद का ख्याल रखना होता है। समय पर सोना, समय पर उठना और जो सही है वही करना यही असली अनुशासन है। और जब यह आदत बन जाता है, तो मन अपने आप शांत और मजबूत हो जाता है।

सनातन धर्म यह भी सिखाता है कि इंद्रियों पर थोड़ा नियंत्रण आत्मा को बहुत शक्ति देता है। हर इच्छा को तुरंत पूरा करना ज़रूरी नहीं होता। कभी रुकना और कभी ना कहना यही अनुशासन इंसान को गिरने से बचाता है।

मैं तु ना रिं आपसे यही कहना चाहता हूँ कि अगर आपके जीवन में थोड़ा सा अनुशासन आ जाए, तो बहुत सी परेशानियाँ अपने आप कम हो जाती हैं। क्योंकि अनुशासित जीवन दिमाग को साफ, मन को शांत और निर्णय को सही बनाता है।

और यही कारण है कि मैं पूरे गर्व से कहता हूँ कि हाँ, मैं हिन्दू हूँ, क्योंकि मेरा धर्म मुझे सिखाता है कि अनुशासन कोई बंधन नहीं, बल्कि सच्ची स्वतंत्रता है।

लेखक / Writer : तु ना रिं 🔱
प्रकाशन / Publish By : सनातन संवाद


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