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भारत में पहली बार 3D-प्रिंटेड ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन, मौसम पूर्वानुमान में आएगा बड़ा बदलाव

 भारत में पहली बार 3D-प्रिंटेड ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन, मौसम पूर्वानुमान में आएगा बड़ा बदलाव 



सनातन संवाद | विज्ञान एवं तकनीक

भारत ने मौसम विज्ञान के क्षेत्र में एक और बड़ी तकनीकी छलांग लगाई है। अब देश में 3D-प्रिंटिंग तकनीक से बने स्वदेशी स्वचालित मौसम स्टेशन (Automatic Weather Station – AWS) तैयार किए जा रहे हैं। इन अत्याधुनिक स्टेशनों के जरिए मौसम से जुड़ा डेटा और अधिक सटीक, तेज और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध हो सकेगा।

सरकार की महत्वाकांक्षी ‘मिशन मौसम’ योजना के अंतर्गत इन स्टेशनों की पहली श्रृंखला फरवरी महीने से दिल्ली में स्थापित की जाएगी।

🔶 क्या है 3D-प्रिंटेड ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन?

3D-प्रिंटेड AWS एक ऐसी उन्नत प्रणाली है जो

तापमान

हवा की गति और दिशा

आर्द्रता (Humidity)

वर्षा (Rainfall)

जैसे मौसम संबंधी आंकड़ों को स्वचालित रूप से मापकर सीधे सर्वर तक भेजती है। इसमें मानवीय हस्तक्षेप की आवश्यकता बहुत कम होती है, जिससे समय और लागत दोनों की बचत होती है।

🔶 ‘मिशन मौसम’ क्या है?

भारत सरकार ने मौसम पूर्वानुमान प्रणाली को आधुनिक और मजबूत बनाने के लिए ‘मिशन मौसम’ नामक एक राष्ट्रीय योजना शुरू की है।

📌 इस मिशन पर लगभग ₹2000 करोड़ खर्च किए जाएंगे

📌 इसका संचालन भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM), पुणे कर रहा है

📌 यह संस्थान पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (MoES) के अंतर्गत कार्य करता है

इस मिशन का लक्ष्य देशभर में मौसम अवलोकन नेटवर्क को अंतिम छोर तक मजबूत करना है।

🔶 सरकार का उद्देश्य क्या है?

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अनुसार, भारत में अभी कई क्षेत्रों में मौसम डेटा की कमी है।

सरकार का उद्देश्य है—

✔️ अधिक स्थानों से रीयल-टाइम डेटा जुटाना

✔️ शहरी इलाकों में सटीक स्थानीय पूर्वानुमान देना

✔️ हीटवेव, भारी बारिश और तूफान जैसी आपदाओं की बेहतर चेतावनी देना

इन 3D-प्रिंटेड AWS को सौर ऊर्जा से चलाया जाएगा, जिससे ये पर्यावरण के अनुकूल भी होंगे।

🔶 पहले किन शहरों में लगेंगे ये स्टेशन?

सरकार की योजना के अनुसार, शुरुआती चरण में बड़े महानगरों पर फोकस किया जाएगा—

दिल्ली

मुंबई

कोलकाता

चेन्नई

अगले छह महीनों में इन शहरों में AWS और मौसम रडार नेटवर्क का तेजी से विस्तार किया जाएगा।

🔶 पारंपरिक मौसम केंद्रों से कैसे अलग हैं ये AWS?

पारंपरिक वेधशाला

3D-प्रिंटेड AWS

मैनुअल निगरानी

पूरी तरह स्वचालित

ज्यादा खर्च

कम लागत

सीमित डेटा

रीयल-टाइम डेटा

अधिक रखरखाव

कम मानव निर्भरता

हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि सेंसर की सही कैलिब्रेशन और नियमित रखरखाव बेहद जरूरी है, ताकि गलत आंकड़ों से बचा जा सके।

🔶 पहले क्यों उठे थे सवाल?

इस साल कुछ AWS स्टेशनों द्वारा असामान्य रूप से ज्यादा तापमान दिखाए जाने की घटनाएं सामने आई थीं। जांच में पता चला कि

कुछ सेंसर खराब थे

कुछ स्टेशन गलत स्थानों पर लगाए गए थे

इसी अनुभव के आधार पर नए 3D-प्रिंटेड स्टेशनों में गुणवत्ता और सटीकता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

🔶 सनातन संवाद विश्लेषण

3D-प्रिंटेड ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन भारत को मौसम पूर्वानुमान के क्षेत्र में आत्मनिर्भर और तकनीकी रूप से मजबूत बनाएंगे।

इससे न केवल आम नागरिकों को समय पर चेतावनी मिलेगी, बल्कि

किसान

आपदा प्रबंधन एजेंसियां

शहरी प्रशासन

भी बेहतर निर्णय ले सकेंगे।

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