🦚 भगवान श्रीकृष्ण का ऐसा दिव्य परिचय, जो बहुत कम लोग जानते हैं
सनातन संवाद | धर्म–इतिहास विशेष
भगवान श्रीकृष्ण केवल एक युगपुरुष नहीं थे, बल्कि वे स्वयं पूर्ण ब्रह्म, योगेश्वर और काल के नियंता थे। उनके जीवन की घटनाएँ केवल लीला नहीं, बल्कि धर्म, नीति, राजनीति और अध्यात्म का जीवंत पाठ हैं। पुराणों और शास्त्रों में श्रीकृष्ण के जीवन का जो कालक्रम मिलता है, वह अत्यंत अद्भुत और वैज्ञानिक दृष्टि से भी विचारणीय है।
यह लेख भगवान श्रीकृष्ण के जीवन की उन प्रमुख घटनाओं को प्रस्तुत करता है, जिन्हें शायद आपने पहले कभी इस रूप में न पढ़ा हो।
🌸 भगवान श्रीकृष्ण का जन्म कब हुआ?
भागवत महापुराण के अनुसार—
भगवान श्रीकृष्ण का अवतरण
📌 वैवस्वत मन्वंतर के
📌 28वें द्वापर युग में
📌 भाद्रपद मास, कृष्ण पक्ष, अष्टमी तिथि
📌 अर्धरात्रि के आठवें मुहूर्त में हुआ।
शास्त्रीय गणना के अनुसार, श्रीकृष्ण का जन्म 3112 ईसा पूर्व माना जाता है, जो आज से लगभग 5133 वर्ष पूर्व है।
उनका जन्म मथुरा में कंस के कारागार में माता देवकी और पिता वसुदेव के यहाँ हुआ। उसी रात वसुदेव जी बालकृष्ण को गोकुल में नंद–यशोदा के घर पहुँचा आए।
🍼 बाल्यकाल की दिव्य लीलाएँ (संक्षेप में)
🔹 जन्म के कुछ ही दिनों बाद पूतना का वध
🔹 शैशव अवस्था में तृणावर्त, शकटासुर, यमलार्जुन का उद्धार
🔹 गोकुल से वृंदावन गमन
🔹 वत्सासुर, बकासुर, अघासुर जैसे राक्षसों का संहार
🔹 कालिया नाग का मर्दन और दावानल का पान
🔹 ब्रह्मा के गर्व का भंग
इन लीलाओं से यह स्पष्ट होता है कि बालकृष्ण साधारण बालक नहीं, बल्कि स्वयं नारायण थे।
🏔️ गोवर्धन लीला और इंद्र का अहंकार भंग
लगभग 7 वर्ष की आयु में श्रीकृष्ण ने
👉 अपनी छोटी उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर
👉 इंद्रदेव के अहंकार को चूर कर दिया।
इसी लीला के बाद श्रीकृष्ण को ‘गोविंद’ नाम प्राप्त हुआ।
🎓 गुरुकुल शिक्षा और 64 कलाओं का ज्ञान
करीब 11 वर्ष की आयु में श्रीकृष्ण अवंतिका में
सांदीपनि मुनि के आश्रम पहुँचे और
📚 मात्र 126 दिनों में
👉 चारों वेद
👉 उपवेद
👉 धनुर्वेद
👉 गजविद्या, अश्वविद्या
👉 कुल 64 कलाओं में निपुणता प्राप्त की।
⚔️ कंस वध और मथुरा का उद्धार
लगभग 10 वर्ष की आयु में
🔸 मथुरा जाकर कंस का वध किया
🔸 उग्रसेन को पुनः सिंहासन पर बैठाया
🔸 मथुरा को अधर्म से मुक्त कराया
🌊 द्वारका की स्थापना और दैत्यों का अंत
लगभग 28 वर्ष की आयु में
🏛️ समुद्र के बीच द्वारका नगरी की स्थापना की
⚔️ कालयवन, जरासंध, नरकासुर जैसे अधर्मी शासकों का अंत किया
👰♀️ रुक्मिणी, जाम्बवती, सत्यभामा सहित अनेक विवाह
🌳 पारिजात वृक्ष को इंद्रलोक से द्वारका लाए
🏹 महाभारत काल और गीता का उपदेश
लगभग 89 वर्ष की आयु में
📜 कुरुक्षेत्र युद्ध से पूर्व
👉 अर्जुन को श्रीमद्भगवद्गीता का दिव्य उपदेश दिया
👉 स्वयं शस्त्र न उठाकर सारथी बन धर्म की विजय सुनिश्चित की
🕊️ द्वारका विनाश और स्वर्गारोहण
🔹 125 वर्ष की आयु में यदुवंश का विनाश
🔹 उद्धव को अंतिम उपदेश
🔹 प्रभास क्षेत्र में देह त्याग
🔹 उसी क्षण से कलियुग का आरंभ
🔔 सनातन संवाद का निष्कर्ष
भगवान श्रीकृष्ण का जीवन यह सिखाता है कि
धर्म की रक्षा के लिए नीति, बुद्धि और करुणा—तीनों आवश्यक हैं।
वे केवल पूजनीय देवता नहीं, बल्कि
✔️ महान रणनीतिकार
✔️ श्रेष्ठ गुरु
✔️ आदर्श मित्र
✔️ और धर्म के साक्षात स्वरूप थे।
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