मैं गर्व से कहता हूँ — मैं हिन्दू हूँ, क्योंकि मेरा धर्म मुझे जीवन को उत्सव की तरह जीना सिखाता है
नमस्कार, मैं तु ना रिं, एक सनातनी।
आज मैं आपको सनातन धर्म की उस सुंदर भावना के बारे में बताना चाहता हूँ जो जीवन को बोझ नहीं, उत्सव बना देती है।
सनातन धर्म दुख को भी जीवन का हिस्सा मानता है, लेकिन वह हमें उसमें डूबे रहने नहीं देता। हमारे यहाँ हर ऋतु का उत्सव है, हर बदलाव का पर्व है, हर नए आरंभ का स्वागत है। दीपावली हो, होली हो, मकर संक्रांति हो या नवरात्रि, हर त्योहार हमें यही सिखाता है कि जीवन केवल संघर्ष नहीं, आनंद भी है।
हम दीप जलाते हैं ताकि अंधकार से डरें नहीं। हम रंग खेलते हैं ताकि मन हल्का हो जाए। हम नाचते गाते हैं ताकि दुख मन में जमा न हो। यह सब दिखावा नहीं, आत्मा को जीवित रखने का तरीका है।
सनातन धर्म यह समझता है कि अगर जीवन में केवल काम और चिंता हो, तो इंसान टूट जाता है। इसलिए उसने पूजा में संगीत, भक्ति में नृत्य, और साधना में भी आनंद रखा। यह धर्म गंभीर है, पर उदास नहीं।
मैं तु ना रिं आपसे यही कहना चाहता हूँ मुस्कुराना भी साधना है। खुश रहना भी एक तरह की पूजा है। और दूसरों की खुशी का कारण बनना सबसे बड़ा पुण्य है।
और इसी सुंदर जीवन दृष्टि के कारण मैं पूरे गर्व से कहता हूँ हाँ, मैं हिन्दू हूँ, क्योंकि मेरा धर्म मुझे जीवन को बोझ नहीं, उत्सव बनाकर जीना सिखाता है।
लेखक / Writer : तु ना रिं 🔱
प्रकाशन / Publish By : सनातन संवाद
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