मैं गर्व से कहता हूँ — मैं हिन्दू हूँ, क्योंकि मेरा धर्म सत्य को जीवन की सबसे बड़ी शक्ति मानता है
नमस्कार, मैं तु ना रिं, एक सनातनी। आज मैं आपसे सनातन धर्म की उस बात को बहुत आसान शब्दों में साझा करना चाहता हूँ जिस पर पूरा जीवन टिका है— सत्य।
सनातन धर्म कहता है कि सत्य केवल बोलने की चीज़ नहीं, जीने की चीज़ है। सच वही नहीं जो शब्दों में कहा जाए, सच वह भी है जो हमारे कर्म में दिखाई दे। इसलिए यहाँ सत्य को पूजा से भी ऊपर रखा गया है।
हमारे धर्म में यह सिखाया गया कि झूठ से थोड़ी देर का फायदा मिल सकता है, पर सत्य से जीवन भर की शांति मिलती है। झूठ मन को भारी करता है, डर पैदा करता है, और रिश्तों में दूरी लाता है। जबकि सत्य मन को हल्का करता है, आँखों में स्थिरता लाता है, और भीतर साहस भर देता है।
सनातन धर्म यह नहीं कहता कि सत्य बोलना हमेशा आसान होगा। यह कहता है— सत्य बोलना कठिन हो सकता है, पर वही सही रास्ता है। जब इंसान सच के साथ खड़ा होता है, तो भले ही वह अकेला लगे, पर भीतर से वह कभी कमजोर नहीं होता।
यह धर्म हमें यह भी सिखाता है कि सत्य कठोर नहीं होना चाहिए। सच वही श्रेष्ठ है जो करुणा के साथ कहा जाए। जिससे किसी का मन टूटे नहीं, बल्कि उसे सही दिशा मिले। इसी संतुलन को सनातन ने सच्ची बुद्धि कहा है।
मैं तु ना रिं आपसे यही कहना चाहता हूँ— अगर आप ईमानदारी से काम करते हैं, अगर आप अपने मन की आवाज़ सुनते हैं, और अगर आप कठिन समय में भी सच का साथ नहीं छोड़ते— तो आप सनातन धर्म को अपने जीवन में जी रहे हैं।
क्योंकि सत्य केवल सिद्धांत नहीं, आत्मा की पहचान है। जो सत्य में टिक गया, वह किसी भी परिस्थिति में डगमगाता नहीं।
और इसी कारण मैं पूरे गर्व से कहता हूँ— “हाँ, मैं हिन्दू हूँ, क्योंकि मेरा धर्म मुझे सिखाता है कि सत्य सबसे बड़ा सहारा है।”
लेखक / Writer : तु ना रिं 🔱
प्रकाशन / Publish By : सनातन संवाद
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