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हिंदू होने का गर्व: क्यों सनातन धर्म हमें 'बाउंस बैक' करना सिखाता है?

हिंदू होने का गर्व: क्यों सनातन धर्म हमें 'बाउंस बैक' करना सिखाता है?

मैं गर्व से कहता हूँ मैं हिन्दू हूँ, क्योंकि मेरा धर्म मुझे टूटकर भी खड़ा होना सिखाता है

A small green sapling growing out of a cracked dry earth under a bright sun, symbolizing the Sanatan spirit of resilience and life

नमस्कार, मैं तु ना रिं, एक सनातनी। आज मैं आपसे उस सीख की बात करना चाहता हूँ जो जीवन के सबसे कठिन समय में इंसान का हाथ थाम लेती है। वह सीख है धैर्य और सहनशक्ति।

जीवन में हर किसी के सामने कभी न कभी ऐसा समय आता है जब सब कुछ बिखरता हुआ लगता है। रिश्ते टूटते हैं, मेहनत का फल देर से मिलता है, और मन बार बार कहता है कि अब बस बहुत हो गया। लेकिन सनातन धर्म ऐसे समय में एक शांत बात सिखाता है कि रुको मत, धैर्य रखो।

हमारा धर्म यह नहीं कहता कि दुख नहीं आएगा। यह कहता है कि दुख आएगा, लेकिन वह तुम्हें तोड़ने नहीं, तुम्हें मजबूत बनाने आएगा। इसी कारण यहाँ आँसू बहाना गलत नहीं माना गया, पर उन्हीं आँसुओं से फिर उठ खड़े होना सिखाया गया।

सनातन धर्म हमें सिखाता है कि जो आज असहनीय लग रहा है, वही कल अनुभव बन जाएगा। और जो अनुभव बन गया, वह तुम्हें पहले से ज्यादा समझदार और शांत बना देगा। इसलिए यहाँ जल्दबाज़ी नहीं, धैर्य को महत्व दिया गया है।

मैं तु ना रिं आपसे यही कहना चाहता हूँ कि अगर आज जीवन भारी लग रहा है, तो अपने आप को कमजोर मत समझिए। यह समय भी गुजर जाएगा। बस अपने भीतर विश्वास बनाए रखिए। क्योंकि सनातन धर्म मानता है कि जो सहन कर सकता है, वही सच में शक्तिशाली है।

और यही कारण है कि मैं पूरे गर्व से कहता हूँ कि हाँ, मैं हिन्दू हूँ, क्योंकि मेरा धर्म मुझे सिखाता है कि जीवन चाहे जितना भी झुका दे, मुझे फिर से खड़ा होना है।

लेखक / Writer : तु ना रिं 🔱
प्रकाशन / Publish By : सनातन संवाद


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