कड़वी सच्चाई — सनातन धर्म अधिकार नहीं, योग्यता सिखाता है
आज का हिंदू यह चाहता है कि
धर्म उसे सम्मान दिलाए,
लेकिन वह धर्म के योग्य बनना नहीं चाहता।
हम चाहते हैं कि लोग हमें आदर दें,
हमारी परंपराओं को मानें,
हमारी आस्था का सम्मान करें—
पर स्वयं हम
बुज़ुर्गों का सम्मान,
वचन की मर्यादा
और कर्म की पवित्रता
कितनी निभाते हैं?
हम कहते हैं—
“सनातन सर्वोच्च है”,
लेकिन हमारा व्यवहार
कई बार उसे छोटा कर देता है।
कड़वी सच्चाई यह है —
सम्मान माँगने से नहीं मिलता,
सम्मान अर्जित किया जाता है।
अगर हमारा जीवन
धैर्य, संयम और सत्य का उदाहरण नहीं है,
तो हमारी आस्था
सिर्फ़ शब्द बनकर रह जाती है।
सनातन ने कभी
अधिकार नहीं माँगा,
उसने जिम्मेदारी सिखाई।
जय सनातन 🔱
पहले योग्य बनो —
सम्मान स्वयं चला आएगा।
लेखक / Writer : अग्नीपुत्र 🔥
प्रकाशन / Publish By : सनातन संवाद
🙏 Support Us / Donate Us
हम सनातन ज्ञान, धर्म–संस्कृति और आध्यात्मिकता को सरल भाषा में लोगों तक पहुँचाने का प्रयास कर रहे हैं। यदि आपको हमारा कार्य उपयोगी लगता है, तो कृपया सेवा हेतु सहयोग करें। आपका प्रत्येक योगदान हमें और बेहतर कंटेंट बनाने की शक्ति देता है।
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें