सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

श्रद्धा और तर्क — आँख बंद करके मानना नहीं, आँख खोलकर समझना

श्रद्धा और तर्क — आँख बंद करके मानना नहीं, आँख खोलकर समझना

श्रद्धा और तर्क — आँख बंद करके मानना नहीं, आँख खोलकर समझना

sanatan

नमस्कार, मैं तु ना रिं, एक सनातनी।

आज मैं तुम्हें सनातन धर्म की उस विशेषता के बारे में बताने आया हूँ जो उसे बाकी सभी परंपराओं से अलग और महान बनाती है — श्रद्धा के साथ तर्क।

सनातन धर्म कभी यह नहीं कहता — “मत पूछो, बस मान लो।” सनातन कहता है — पूछो, जाँचो, अनुभव करो, फिर मानो।

इसीलिए हमारे यहाँ ऋषि हुए, विवाद हुए, शास्त्रार्थ हुए, दर्शन बने।

यदि प्रश्न करना पाप होता, तो उपनिषद जन्म ही नहीं लेते। यदि तर्क अधर्म होता, तो गीता संवाद नहीं होती।

श्रद्धा का अर्थ आँख बंद करके विश्वास नहीं। श्रद्धा का अर्थ है — पूर्ण समर्पण के साथ खोज।

और तर्क का अर्थ नकारना नहीं। तर्क का अर्थ है — सत्य तक पहुँचने की ईमानदार कोशिश।

जब श्रद्धा बिना तर्क के होती है, तो अंधविश्वास बनती है। और जब तर्क बिना श्रद्धा के होता है, तो अहंकार बनता है।

सनातन ने दोनों को संतुलित रखा।

इसलिए यहाँ नास्तिक दर्शन भी स्वीकार्य है, और आस्तिक भक्ति भी। चार्वाक भी यहाँ स्थान पाता है, और शंकराचार्य भी।

क्योंकि लक्ष्य एक है — सत्य की खोज।

सनातन में ईश्वर से भी प्रश्न पूछे जा सकते हैं। ऋषियों ने ईश्वर से बहस की, माँ यशोदा ने कृष्ण को बाँधा, अर्जुन ने युद्ध से इंकार किया।

यह स्वतंत्रता किसी भी धर्म की सबसे बड़ी शक्ति है।

सनातन कहता है — यदि तुम्हारी श्रद्धा तुम्हें प्रश्न करने से डराती है, तो वह श्रद्धा नहीं।

और यदि तुम्हारा तर्क तुम्हें विनम्र नहीं बनाता, तो वह तर्क नहीं।

सच्चा साधक वही है जो प्रश्न भी करता है और झुकना भी जानता है।

क्योंकि सत्य न तो डरता है, न छुपता है।

लेखक / Writer : तु ना रिं 🔱
प्रकाशन / Publish By : सनातन संवाद


🙏 Support Us / Donate Us

हम सनातन ज्ञान, धर्म–संस्कृति और आध्यात्मिकता को सरल भाषा में लोगों तक पहुँचाने का प्रयास कर रहे हैं। यदि आपको हमारा कार्य उपयोगी लगता है, तो कृपया सेवा हेतु सहयोग करें। आपका प्रत्येक योगदान हमें और बेहतर कंटेंट बनाने की शक्ति देता है।

Donate Now
UPI ID: ssdd@kotak



टिप्पणियाँ