सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के ऐलान से तेज़ हुआ सनातन धर्म पर राष्ट्रीय विमर्श
नई दिल्ली | 13 जनवरी 2026
सनातन परंपरा और सांस्कृतिक पहचान
देश के सामाजिक और राजनीतिक मंचों पर आज सनातन धर्म की सांस्कृतिक पहचान और उसके संरक्षण को लेकर व्यापक बहस तेज़ हो गई है। इस बीच कई प्रमुख नेताओं ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि भारत की संस्कृति और सनातन परंपरा को समाप्त करना किसी भी शक्ति के लिए संभव नहीं है, क्योंकि यह केवल एक आस्था नहीं बल्कि करोड़ों भारतीयों की पहचान और जीवन-दृष्टि है।
सोमनाथ स्वाभिमान पर्व की घोषणा
इसी क्रम में ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ को पूरे वर्ष मनाने की घोषणा की गई है। नेताओं के अनुसार इस अभियान का उद्देश्य विश्वभर को यह संदेश देना है कि सनातन धर्म केवल अतीत की विरासत नहीं बल्कि वर्तमान और भविष्य की चेतना भी है। सोमनाथ मंदिर को भारत की आत्मा और स्वाभिमान का प्रतीक बताते हुए कहा गया कि इस पर्व के माध्यम से ऐतिहासिक आघातों और सांस्कृतिक संघर्षों की स्मृति को सम्मान के साथ प्रस्तुत किया जाएगा।
सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और सामाजिक प्रभाव
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह पहल आने वाले समय में सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और धार्मिक पहचान से जुड़े विमर्श को और अधिक प्रबल करेगी। वहीं सामाजिक संगठनों ने इसे भारतीय सभ्यता की जड़ों से जुड़ने का प्रयास बताया है।
सोशल मीडिया से लेकर सार्वजनिक मंचों तक, आज ‘सोमनाथ स्वाभिमान’ और ‘सनातन संस्कृति’ जैसे विषय चर्चा के केंद्र में रहे, जिससे यह स्पष्ट हो गया है कि यह मुद्दा अब केवल धार्मिक नहीं बल्कि राष्ट्रीय विमर्श का अहम हिस्सा बन चुका है।
लेखक / Writer : अभिमन्यू 🛞
प्रकाशन / Publish By : सनातन संवाद
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