वाणी की तपस्या – कब मौन श्रेष्ठ है | तु ना रिं वाणी की तपस्या – कब मौन श्रेष्ठ है नमस्कार… मैं तु ना रिं, एक सनातनी। सनातन दर्शन में वाणी को अत्यंत शक्तिशाली साधन माना गया है। शब्द केवल ध्वनि नहीं होते; वे विचारों और भावनाओं की ऊर्जा को संसार में प्रकट कर…
सनातन संस्कृति में वाणी की शुद्धता का महत्व सनातन संस्कृति में वाणी की शुद्धता का महत्व सनातन संस्कृति में वाणी को केवल बोलने का माध्यम नहीं माना गया, बल्कि सृष्टि की मूल शक्ति समझा गया है। वेदों की शुरुआत ही “वाक्” की महिमा से होती है। यहाँ यह मान्यता है कि स…
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