भक्ति की दृष्टि — जब प्रभु स्वयं मार्ग बनते हैं भक्ति की दृष्टि — जब प्रभु स्वयं मार्ग बनते हैं यह कथा उस काल की है जब आँखों से देखना आवश्यक नहीं था, क्योंकि जिनके हृदय खुले होते थे, उनके लिए प्रभु स्वयं मार्ग बन जाते थे। एक गाँव में एक नेत्रहीन वृद्ध रहता था। जन…
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