भारतीय दर्शन में विवेक और वैराग्य का संतुलन भारतीय दर्शन में विवेक और वैराग्य का संतुलन भारतीय दर्शन में जीवन को कभी भी एकांगी नहीं देखा गया। यहाँ न तो केवल भोग को सत्य माना गया, न ही केवल त्याग को। सनातन दृष्टि ने मनुष्य के भीतर चलने वाले द्वंद्व को गहराई से …
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