पहले स्वयं पर विजय — सनातन की असली जीत
आज का हिंदू यह मान बैठा है कि धर्म दूसरों को सुधारने का औज़ार है, खुद को सुधारने का दर्पण नहीं।
हम तुरंत उँगली उठाते हैं— समाज गलत है, युवा बिगड़े हैं, व्यवस्था भ्रष्ट है। लेकिन यह पूछने का साहस नहीं करते— मैं कहाँ खड़ा हूँ?
हम चाहते हैं कि दुनिया हमारे आदर्श माने, पर अपने घर में आदर्श जीना टाल देते हैं।
कड़वी सच्चाई यह है — जिस दिन हम खुद पर कठोर हो जाएँ, उस दिन दूसरों पर कठोर होने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी।
सनातन पहले आत्मसंयम सिखाता है, फिर समाज-सुधार। पहले शुद्धि भीतर की, फिर व्यवस्था बाहर की।
अगर धर्म हमारे अहंकार को कम नहीं कर रहा, तो हमने धर्म नहीं अपनाया— हमने उसे हथियार बना लिया।
जय सनातन 🔱
पहले स्वयं पर विजय पाओ — यही सनातन की असली जीत है।
लेखक / Writer : अग्नीपुत्र 🔥
प्रकाशन / Publish By : सनातन संवाद
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