सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

गर्व से कहो मैं हिन्दू हूँ: क्यों सनातन धर्म हमें हर सुबह नया जन्म लेना सिखाता है?

गर्व से कहो मैं हिन्दू हूँ: क्यों सनातन धर्म हमें हर सुबह नया जन्म लेना सिखाता है?

मैं गर्व से कहता हूँ — मैं हिन्दू हूँ, क्योंकि मेरा धर्म मुझे हर दिन नया जन्म लेना सिखाता है

person splashing water on their face at dawn with the sun rising behind them, symbolizing the washing away of yesterday and the birth of a new day

नमस्कार, मैं तु ना रिं, एक सनातनी। आज मैं आपको सनातन धर्म की उस बहुत गहरी लेकिन बहुत सरल सीख के बारे में बताना चाहता हूँ जो हर इंसान को भीतर से ताज़ा कर देती है— हर दिन नया आरंभ।

सनातन धर्म मानता है कि हर सुबह केवल सूरज ही नहीं उगता, हम भी नये होकर उठते हैं। कल जो गलती हुई, वह आज की पहचान नहीं बनती। कल जो दुख था, वह आज की दिशा तय नहीं करता। आज एक नया अवसर है— नया सोचने का, नया करने का, और खुद को थोड़ा बेहतर बनाने का।

इसीलिए हमारे यहाँ सुबह-सुबह स्नान, दीप, और प्रार्थना की परंपरा है। यह केवल शरीर साफ करने के लिए नहीं, मन को भी कल की थकान से मुक्त करने के लिए है। हर सुबह खुद से कहना— आज मैं शांत रहूँगा, आज मैं सही करूँगा, आज मैं बेहतर बनूँगा— यही सनातन की साधना है।

सनातन धर्म यह नहीं कहता कि तुम परफेक्ट बनो। यह कहता है— तुम प्रयास करते रहो। हर दिन थोड़ा सुधार, हर दिन थोड़ा ज्ञान, हर दिन थोड़ा प्रेम। यही जीवन को पवित्र बनाता है।

मैं तु ना रिं आपसे यही कहना चाहता हूँ— अगर आप गिर भी गए हों, तो चिंता मत करो। अगली सुबह उठो, फिर से कोशिश करो। क्योंकि सनातन धर्म मानता है— हर श्वास के साथ हमें एक नया अवसर मिलता है।

और इसी आशा की शिक्षा के कारण मैं पूरे गर्व से कहता हूँ— “हाँ, मैं हिन्दू हूँ, क्योंकि मेरा धर्म मुझे हार नहीं, हर दिन एक नया जन्म देता है।”

लेखक / Writer : तु ना रिं 🔱
प्रकाशन / Publish By : सनातन संवाद


🙏 Support Us / Donate Us

हम सनातन ज्ञान, धर्म–संस्कृति और आध्यात्मिकता को सरल भाषा में लोगों तक पहुँचाने का प्रयास कर रहे हैं। यदि आपको हमारा कार्य उपयोगी लगता है, तो कृपया सेवा हेतु सहयोग करें। आपका प्रत्येक योगदान हमें और बेहतर कंटेंट बनाने की शक्ति देता है।

Donate Now
UPI ID: ssdd@kotak



टिप्पणियाँ