षड्दर्शन — सत्य को देखने के छह मार्ग
नमस्कार, मैं तु ना रिं, एक सनातनी।
आज मैं तुम्हें उस आधार से परिचित कराने आया हूँ जिस पर सनातन की पूरी बौद्धिक इमारत खड़ी है — षड्दर्शन।
सनातन एक मत नहीं, अन्वेषण है। और सत्य तक पहुँचने के लिए ऋषियों ने एक नहीं, छह रास्ते दिए।
सनातन कहता है — सत्य एक है, पर उसे देखने की दृष्टि अनेक हो सकती है। इसीलिए यहाँ बहस भी है, असहमति भी है, और फिर भी एकता है।
न्याय दर्शन सिखाता है — सोचो, जाँचो, प्रमाण खोजो। यह तर्क और विवेक का मार्ग है। अंधविश्वास नहीं, कारण–परिणाम की स्पष्टता।
वैशेषिक दर्शन कहता है — सृष्टि सूक्ष्म तत्वों से बनी है। आज जिसे विज्ञान परमाणु कहता है, ऋषि उसे गुण–द्रव्य के रूप में जानते थे।
सांख्य दर्शन बताता है — प्रकृति और पुरुष अलग हैं। दुःख इसलिए है क्योंकि हम दोनों को गड्ड–मड्ड कर देते हैं। समझ आ जाए — तो मुक्ति निकट है।
योग दर्शन वही समझ जीवन में उतारने की विधि देता है। यह केवल आसन नहीं, चित्त की शुद्धि है। जो जाना गया, उसे जीने का विज्ञान।
मीमांसा दर्शन कर्म की शक्ति बताता है। कर्तव्य, अनुशासन और यज्ञ का मार्ग। यह सिखाता है — बिना कर्म के ज्ञान भी अधूरा है।
वेदांत दर्शन कहता है — अंततः सब ब्रह्म है। जो खोज रहा है और जिसे खोजा जा रहा है — दोनों एक हैं। यही अद्वैत का शिखर है।
ध्यान दो — ये दर्शन एक–दूसरे को काटते नहीं, पूरा करते हैं। जैसे आँखें अलग–अलग दिशाओं में देखती हैं, पर मस्तिष्क एक ही चित्र बनाता है।
सनातन की महानता यही है — यह किसी एक विचार को सर्वोच्च घोषित नहीं करता। यह कहता है — जो तुम्हारे स्वभाव से मेल खाए, वही तुम्हारा मार्ग है।
इसीलिए यहाँ तर्कशील भी सुरक्षित है, भक्त भी सुरक्षित है, योगी भी सुरक्षित है।
सत्य तक पहुँचने के लिए तुम्हें मजबूर नहीं किया जाता, आमंत्रित किया जाता है।
और यही कारण है कि सनातन जिंदा है — क्योंकि यह सोचने से डरता नहीं।
🌿 सनातन इतिहास ज्ञान श्रृंखला
लेखक / Writer : तु ना रिं 🔱
प्रकाशन / Publish By : सनातन संवाद
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