विवेक — सही और आसान में से सही चुनने की शक्ति
नमस्कार, मैं तु ना रिं, एक सनातनी।
आज मैं तुम्हें उस गुण की बात बताने आया हूँ जिसके बिना ज्ञान बोझ बन जाता है और भक्ति अंधी — विवेक।
विवेक का अर्थ किताबें पढ़ लेना नहीं। विवेक का अर्थ है — हर परिस्थिति में क्या उचित है यह पहचान पाने की क्षमता।
अक्सर जीवन में दो रास्ते होते हैं — एक आसान, एक सही। अधिकांश लोग आसान चुनते हैं और फिर कहते हैं — “परिस्थिति ही ऐसी थी।” सनातन कहता है — परिस्थिति कभी अंतिम नहीं होती, विवेक अंतिम होता है।
विवेक वह दीप है जो भावनाओं के अंधकार में सही दिशा दिखाता है। क्रोध आए, तो विवेक कहे — रुको। लालच आए, तो विवेक कहे — सोचो। भय आए, तो विवेक कहे — सत्य मत छोड़ो।
यही कारण है कि सनातन में केवल ज्ञान नहीं, बुद्धि और विवेक को पूज्य माना गया। सरस्वती केवल विद्या नहीं, विवेक का भी प्रतीक हैं।
कृष्ण ने अर्जुन को शस्त्र चलाना नहीं सिखाया, वह तो उसे आता था। कृष्ण ने उसे सिखाया — कब चलाना है और कब नहीं।
विवेक का अर्थ कठोर होना नहीं। विवेक का अर्थ है — स्पष्ट होना। जो व्यक्ति हर बात में बह जाता है, वह भावुक है। जो हर बात काट देता है, वह अहंकारी है। और जो सुनकर, सोचकर निर्णय लेता है — वही विवेकी है।
आज की दुनिया सूचना से भरी है, पर विवेक से खाली। इसलिए लोग जानते बहुत हैं, समझते कम हैं। सनातन इसलिए कहता है — ज्ञान बढ़ाओ, पर विवेक के साथ। क्योंकि बिना विवेक ज्ञान भी बंधन बन जाता है।
और जिस दिन तुम्हारा विवेक जाग गया, समझ लेना — तुम्हारा धर्म अपने आप जाग गया।
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