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मैं गर्व से कहता हूँ — मैं हिन्दू हूँ, क्योंकि मेरा धर्म मुझे प्रतीक्षा करना सिखाता है

मैं गर्व से कहता हूँ — मैं हिन्दू हूँ, क्योंकि मेरा धर्म मुझे प्रतीक्षा करना सिखाता है

मैं गर्व से कहता हूँ — मैं हिन्दू हूँ, क्योंकि मेरा धर्म मुझे प्रतीक्षा करना सिखाता है

Pratiksha - Patience in Sanatan

नमस्कार, मैं तु ना रिं, एक सनातनी।

आज मैं आपको सनातन धर्म की उस शिक्षा के बारे में बताने आया हूँ जिसे आज की तेज़ दुनिया भूलती जा रही है— प्रतीक्षा, यानी धैर्य से इंतज़ार करना

आज हम सब जल्दी में हैं। जल्दी सफलता चाहिए, जल्दी परिणाम चाहिए, जल्दी पहचान चाहिए। लेकिन सनातन धर्म बहुत शांति से कहता है— हर चीज़ का एक समय होता है। बीज बोने के अगले दिन फल नहीं मिलते, पर बीज बोए बिना कभी फल भी नहीं मिलते।

सनातन धर्म हमें सिखाता है कि जो सही समय का इंतज़ार करना जानता है, वह कभी टूटता नहीं। धैर्य उसे स्थिर रखता है, और स्थिरता उसे सही निर्णय लेने में मदद करती है। जल्दबाज़ी अक्सर हमें गलत रास्ते पर ले जाती है, जबकि प्रतीक्षा रास्ते को साफ़ कर देती है।

यह धर्म यह भी समझाता है कि प्रतीक्षा का मतलब हाथ पर हाथ रखकर बैठना नहीं है। प्रतीक्षा का मतलब है— कर्म करते रहना, और परिणाम को लेकर बेचैन न होना। यही संतुलन मनुष्य को भीतर से मजबूत बनाता है।

मैं तु ना रिं आपसे यही कहना चाहता हूँ— अगर आज आपके जीवन में कुछ अटका हुआ लग रहा है, तो खुद को दोष मत दीजिए। शायद समय अभी तैयार नहीं है। आप अपना काम करते रहिए, धैर्य रखिए, समय अपने आप दरवाज़ा खोलेगा।

और इसी गहरी समझ के कारण मैं पूरे गर्व से कहता हूँ— “हाँ, मैं हिन्दू हूँ, क्योंकि मेरा धर्म मुझे सिखाता है कि प्रतीक्षा भी साधना है।”

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