माघ मास की साधना: आत्मशुद्धि और सामाजिक अनुशासन का पर्व | Sanatan Sanvad 7 फ़रवरी 2026 माघ मास की तीर्थ चेतना: आस्था की ऊष्मा और आत्मसंयम का अभ्यास 7 फ़रवरी 2026 को माघ मास क…
काल, युग और अनंत समय की दृष्टि | Sanatan Sanvad काल, युग और अनंत समय की दृष्टि हिन्दू धर्म के इतिहास को समझने में सबसे बड़ी भूल यह होती है कि हम उसे पश्चिमी इतिहास-बोध की सीधी रेखा…
मैं गर्व से कहता हूँ — मैं हिन्दू हूँ, क्योंकि मेरा धर्म मुझे प्रतीक्षा करना सिखाता है मैं गर्व से कहता हूँ — मैं हिन्दू हूँ, क्योंकि मेरा धर्म मुझे प्रतीक्षा करना सिखाता है नमस्कार, मैं तु ना रिं , एक सनातनी। आज मैं आपको सनातन धर्म की उस शिक…
विवेक: सही और आसान में से सही चुनने की शक्ति | Sanatan Sanvad विवेक — सही और आसान में से सही चुनने की शक्ति नमस्कार, मैं तु ना रिं , एक सनातनी। आज मैं तुम्हें उस गुण की बात बता…
भक्त कण्णप्पा: जब शिकारी के प्रेम के आगे शिव के शास्त्र नतमस्तक हुए | Sanatan Sanvad भक्त कण्णप्पा: जब एक शिकारी के अटूट प्रेम के आगे शिव के शास्त्र भी नतमस्तक हो गए नमस्कार, मैं त…
Hindu Youth Survival Manual (Part-1): शोर की दुनिया में स्थिर कैसे रहें | Sanatan Sanvad 🔥 Hindu Youth Survival Manual (Part-1): शोर की दुनिया में स्थिर कैसे रहा जाए 🔥 नमस्कार, म…
स्वर्ग से बड़ा साथी: युधिष्ठिर और कुत्ते की कहानी | Sanatan Sanvad स्वर्ग से बड़ा साथी: 'तु ना रिं' के साथ जानिए क्यों युधिष्ठिर ने मोक्ष के द्वार पर भी अपना धर्म नहीं छोड़ा। …
अश्वत्थामा का श्राप: विजय के बाद भी जो कभी नहीं जी पाया | Sanatan Sanvad अश्वत्थामा का श्राप (विजय के बाद भी जो कभी नहीं जी पाया) युद्ध खत्म हो चुका था। कुरुक्षेत्र शांत था, प…
पराई पीड़ा में अपना दुःख देखना ही धर्म है | Sanatan Sanvad पराई पीड़ा में अपना दुःख देखना ही धर्म है नमस्कार, मैं तु ना रिं, एक सनातनी। आज मैं उस सूक्ष्म और अत्यंत गहरे सत…
सनातन धर्म में ब्रह्म मुहूर्त का महत्व | Sanatan Sanvad सनातन धर्म में ब्रह्म मुहूर्त को दिन का सबसे पवित्र और ऊर्जावान समय माना गया है। ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से लगभग 1 घंटा 36 मिनट पहले का समय होता है। यह समय सामान्यतः सुबह 3:30 से 5:30 के बीच आता है (स्थान और मौसम के अनुसार बदल सकता …
कृष्ण ने कर्ण को उसका सत्य क्यों नहीं बताया? कृष्ण ने कर्ण को उसका सत्य क्यों नहीं बताया? तु ना रिं 🔱 | सनातन संवाद (यह कथा शोर में नहीं, मौन में कही जाती है) कर्ण… महाभारत का सबसे अकेला योद्धा। दानवीर कहा गया, महारथी माना गया, पर जीवन भर कभी “…
महाभारत की एक सर्वाधिक सच्ची और कठोर कथा — भीष्म की शरशय्या महाभारत की एक सर्वाधिक सच्ची और कठोर कथा — भीष्म की शरशय्या तु ना रिं 🔱 | सनातन संवाद महाभारत की एक सर्वाधिक सच्ची और कठोर कथा है — भीष्म की शरशय्या। यह कथा न युद्ध की विजय की है, न पराजय क…
Blog Post Title 🔥 अगर तुम युवा हिन्दू हो, तो ये 5 बातें कोई तुम्हें नहीं बताएगा 🔥 तु ना रिं 🔱 | सनातन संवाद नमस्कार, मैं तु ना रिं, एक सनातनी। यह लेख भावुक नहीं है। यह लेख नारा नहीं है। यह लेख सीधा, कड़वा और ज़रूरी है। क्योंकि आज का युवा बहुत कु…
सुदामा और श्रीकृष्ण: मित्रता की वह अमर गाथा जहाँ चावल की एक पोटली ने राजवैभव को पीछे छोड़ दिया सुदामा और श्रीकृष्ण — जब मित्रता वैभव से बड़ी सिद्ध हुई तु ना रिं 🔱 | सनातन संवाद नमस्कार, मैं तु ना रिं, एक सनातनी। आज मैं तुम्हें वह कथा सुनाने आया हू…
प्राणीमात्र पर दया ही धर्म है प्राणीमात्र पर दया ही धर्म है नमस्कार, मैं तु ना रिं, एक सनातनी। आज मैं उस मूल सत्य की बात करने आया हूँ जिस पर सनातन धर्म की आत्मा टिकी है — प्राणीमात्र पर दया ही धर्म है। यह कोई भावुक वाक्य नहीं, न ही केवल नैत…
क्षमा — भूल को नहीं, बोझ को छोड़ना क्षमा — भूल को नहीं, बोझ को छोड़ना नमस्कार, मैं तु ना रिं, एक सनातनी। आज मैं तुम्हें उस शक्ति का मर्म बताने आया हूँ जिसे लोग दुर्बलता समझ लेते हैं, पर सनातन में यह आत्मिक बल है — क्षमा। क्षमा का अर्थ गलत क…
संस्कार, लोक और समय के साथ बहता धर्म संस्कार, लोक और समय के साथ बहता धर्म हिन्दू धर्म का इतिहास तब और स्पष्ट होता है जब हम उसे केवल राजाओं, युद्धों या ग्रंथों से नहीं, बल्कि मानव जीवन के हर पड़ाव से जोड़कर देखते हैं। यह परंपरा मनुष्य के जन्म से…