🔥 हिन्दू युवा अगर जाग गया, तो किसे नुकसान होगा? 🔥
नमस्कार, मैं तु ना रिं, एक सनातनी। आज का यह लेख सबसे ज़्यादा असुविधाजनक है। क्योंकि यह सवाल तुमसे नहीं—सिस्टम से है।
ज़रा शांत होकर सोचो। अगर हिन्दू युवा वाकई जाग गया—तो क्या होगा?
क्या वह नफरत फैलाएगा? नहीं। क्या वह हिंसा करेगा? नहीं। वह सिर्फ समझना शुरू करेगा।
और यही बात सबसे ज़्यादा खतरनाक है उनके लिए जो भ्रम पर जीते हैं।
जागा हुआ हिन्दू युवा भीड़ नहीं बनता। वह ट्रोल नहीं बनता। वह blind supporter नहीं बनता।
वह सवाल पूछता है—इतिहास से, मीडिया से, नेरेटिव से, और सबसे पहले खुद से।
अब सोचो—किसे नुकसान होता है ऐसे इंसान से जो खुद सोचने लगे?
- उस सिस्टम को जो डर पर चलता है।
- उस मार्केट को जो असंतोष बेचती है।
- उस विचारधारा को जो अधूरा सच दिखाकर राज करती है।
क्योंकि जागा हुआ युवा identity politics में नहीं फँसता। वह victim card नहीं खेलता। वह guilt में नहीं जीता।
वह जानता है—कि सनातन उसे राजा नहीं, जिम्मेदार मनुष्य बनाता है।
अगर हिन्दू युवा जाग गया, तो वह पूछेगा—“मुझे लड़ाया क्यों जा रहा है?” “मुझे डराया क्यों जा रहा है?” “मुझे शर्मिंदा क्यों किया जा रहा है?”
और जिस दिन ये सवाल आम हो गए, उसी दिन बहुत सी दुकानें अपने आप बंद हो जाएँगी।
यही कारण है कि हिन्दू जागरण को हमेशा दो extremes में दिखाया गया—या तो हिंसक, या फिर हास्यास्पद।
बीच का सच कभी दिखाया ही नहीं गया। क्योंकि बीच का सच सबसे मज़बूत होता है।
अगर सनातन सिर्फ पूजा होता, तो उससे डर नहीं लगता। पर सनातन चेतना है। और चेतना हमेशा सत्ता को असहज करती है।
इसीलिए युद्धभूमि में भी भगवद्गीता डर नहीं, जिम्मेदारी सिखाती है।
कृष्ण कहते हैं—“भागो मत। अंधे मत बनो। पर सोच-समझकर खड़े रहो।” यही जागरण है।
यह लेख किसी के खिलाफ नहीं है। यह लेख भ्रम के खिलाफ है।
क्योंकि हिन्दू युवा के जागने से नुकसान किसी इंसान को नहीं—नुकसान उस झूठ को होगा जो बहुत दिन से आराम से बैठा है।
🕉️ मैं हिन्दू हूँ। और मेरा जागना किसी के खिलाफ नहीं—अज्ञान के खिलाफ है।

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