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मैं गर्व से कहता हूँ — मैं हिन्दू हूँ: विवेक और बुद्धि का सनातन मार्ग | तु ना रिं

मैं गर्व से कहता हूँ — मैं हिन्दू हूँ: विवेक और बुद्धि का सनातन मार्ग | तु ना रिं

मैं गर्व से कहता हूँ — मैं हिन्दू हूँ

नमस्कार, मैं तु ना रिं, एक सनातनी।
Sanatan Dharma Wisdom

आज मैं आपको सनातन धर्म की उस शिक्षा के बारे में बताने आया हूँ जो जीवन को सही दिशा देती है— बुद्धि, यानी समझ से लिया गया निर्णय।

सनातन धर्म यह नहीं कहता कि जो मन में आए वही कर लो।
यह कहता है— सोचो, समझो, फिर करो।

बिना सोचे किया गया कर्म अक्सर पछतावे में बदल जाता है। इसलिए सनातन सिखाता है कि हर कर्म के पीछे एक जागृत विवेक होना चाहिए।

भावना और बुद्धि का संतुलन

हमारे धर्म में भावना और बुद्धि दोनों को महत्व दिया गया है। केवल भावुक होकर लिया गया निर्णय कभी-कभी नुकसान पहुँचा देता है, और केवल तर्क में फँसा इंसान "सूखा" हो जाता है।

"भावना में करुणा रखो, और बुद्धि में विवेक।"

बुद्धि का सही अर्थ

बुद्धि का मतलब चालाक होना नहीं है। बुद्धि का मतलब है— सही समय पर सही बात समझ लेना, और गलत को पहचान कर शांतिपूर्वक उससे दूर हो जाना। जो व्यक्ति विवेक से चलता है, वह कम गलतियाँ करता है, और उनसे सीख भी जल्दी ले लेता है।

निर्णय और विवेक

हर समस्या का समाधान तुरंत प्रतिक्रिया (Reaction) नहीं, बल्कि सही प्रतिक्रिया (Response) होती है। जब मन शांत हो और बुद्धि जाग्रत हो, तभी निर्णय फलदायी होता है।

जीवन में सनातन का अभ्यास

मैं तु ना रिं आपसे यही कहना चाहता हूँ— अगर आप क्रोध में निर्णय नहीं लेते, अगर आप दूसरों की बात सुनते हैं, और अगर आप सही–गलत को समझकर चुनते हैं— तो आप सनातन धर्म को अपने जीवन में जी रहे हैं।

“हाँ, मैं हिन्दू हूँ, क्योंकि मेरा धर्म मुझे भावुक नहीं, विवेकशील इंसान बनना सिखाता है।”

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© सनातन संवाद | लेखक: तु ना रिं 🔱

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