मैं गर्व से कहता हूँ — मैं हिन्दू हूँ
आज मैं आपको सनातन धर्म की उस शिक्षा के बारे में बताने आया हूँ जो जीवन को सही दिशा देती है— बुद्धि, यानी समझ से लिया गया निर्णय।
सनातन धर्म यह नहीं कहता कि जो मन में आए वही कर लो।
यह कहता है— सोचो, समझो, फिर करो।
भावना और बुद्धि का संतुलन
हमारे धर्म में भावना और बुद्धि दोनों को महत्व दिया गया है। केवल भावुक होकर लिया गया निर्णय कभी-कभी नुकसान पहुँचा देता है, और केवल तर्क में फँसा इंसान "सूखा" हो जाता है।
"भावना में करुणा रखो, और बुद्धि में विवेक।"
बुद्धि का सही अर्थ
बुद्धि का मतलब चालाक होना नहीं है। बुद्धि का मतलब है— सही समय पर सही बात समझ लेना, और गलत को पहचान कर शांतिपूर्वक उससे दूर हो जाना। जो व्यक्ति विवेक से चलता है, वह कम गलतियाँ करता है, और उनसे सीख भी जल्दी ले लेता है।
निर्णय और विवेक
हर समस्या का समाधान तुरंत प्रतिक्रिया (Reaction) नहीं, बल्कि सही प्रतिक्रिया (Response) होती है। जब मन शांत हो और बुद्धि जाग्रत हो, तभी निर्णय फलदायी होता है।
जीवन में सनातन का अभ्यास
मैं तु ना रिं आपसे यही कहना चाहता हूँ— अगर आप क्रोध में निर्णय नहीं लेते, अगर आप दूसरों की बात सुनते हैं, और अगर आप सही–गलत को समझकर चुनते हैं— तो आप सनातन धर्म को अपने जीवन में जी रहे हैं।
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