विद्या के दुरुपयोग से समाज कैसे पतन की ओर जाता है विद्या के दुरुपयोग से समाज कैसे पतन की ओर जाता है सनातन दृष्टि में विद्या को कभी तटस्थ शक्ति नहीं माना गया। विद्या को तेज कहा गया—ऐसा तेज जो प्रकाश भी दे सकता है और यदि संयम से रहित हो जाए तो दाह भी कर सकता है।…
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