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सत्यमेव जयते — धर्म का मूल सूत्र

सत्यमेव जयते — धर्म का मूल सूत्र | सनातन संवाद सत्यमेव जयते — धर्म का मूल सूत्र नमस्कार, मैं तु ना रिं, एक सनातनी। आज मैं उस मूल सूत्र को स्मरण कराने आया हूँ जिस पर धर्म की पूरी इमारत खड़ी है — धर्म का मूल है — “सत्यमेव जयते।” यह कोई नारा नहीं, कोई रा…

नम्रता सबसे बड़ा आभूषण है

नमस्कार, मैं तु ना रिं, एक सनातनी। आज मैं उस गुण की बात करने आया हूँ जिसे संसार अक्सर कमज़ोरी समझ लेता है, पर जो वास्तव में मनुष्य की सबसे बड़ी शक्ति है — नम्रता सबसे बड़ा आभूषण है। आभूषण वही होता है जो व्यक्ति के होने को सुंदर बनाए, बोझ न बने। धन, पद, विद्या, शक्ति — ये सब यदि अहंकार …

सेवा ही परम धर्म: सनातन संस्कृति में परोपकार और निष्काम कर्म का वास्तविक अर्थ

सेवा ही परम धर्म: सनातन संस्कृति में परोपकार और निष्काम कर्म का वास्तविक अर्थ सेवा ही परम धर्म: सनातन संस्कृति में निष्काम कर्म का मर्म ✍️ लेखक: तु ना रिं 🔱 | सनातन संवाद "जिस हाथ ने किसी का भार उठाया, उसी हाथ से ईश्वर को छुआ जा सकता है।" …

धर्म: सूचना या आचरण? जानिए क्यों आज का हिंदू केवल धर्म को 'जानता' है, 'जीता' नहीं।

धर्म: सूचना या आचरण? जानिए क्यों आज का हिंदू केवल धर्म को 'जानता' है, 'जीता' नहीं। 🔱 कड़वी सच्चाई – 36 (सनातन धर्म) तु ना रिं 🔱 | सनातन संवाद आज का हिंदू यह मान लेता है कि धर्म उसके शब्दों में है, कर्मों में नहीं। वह सही बात जान…

सहनशीलता — धर्म का आभूषण

सहनशीलता — धर्म का आभूषण सहनशीलता — धर्म का आभूषण तु ना रिं 🔱 | सनातन संवाद नमस्कार, मैं तु ना रिं, एक सनातनी। आज मैं उस गुण की बात करने आया हूँ जिसे कमजोर लोग कमजोरी समझ लेते हैं, और समझदार लोग जीवन का सबसे बड़ा बल मानते हैं — सहनशीलता ही धर्म का आ…

संस्कार — जब जीवन आकार लेता है

संस्कार — जब जीवन आकार लेता है संस्कार — जब जीवन आकार लेता है तु ना रिं 🔱 | सनातन संवाद नमस्कार, मैं तु ना रिं, एक सनातनी। आज मैं तुम्हें उस आधार की बात बताने आया हूँ जिस पर पूरा मानव जीवन खड़ा होता है — संस्कार। सनातन धर्म कहता है — मनुष्य जन्म से पूर्…