गुरु के बिना साधना क्यों अधूरी मानी गई गुरु के बिना साधना क्यों अधूरी मानी गई सनातन धर्म में साधना को कभी अकेले किए जाने वाला प्रयास नहीं माना गया। यहाँ साधना का अर्थ केवल मंत्र-जप, व्रत या ध्यान नहीं है, बल्कि चेतना का क्रमिक परिष्कार है। और इस परिष्कार की या…
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