सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं
Self-Improvement लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

संघर्ष ही व्यक्तित्व की शिल्पशाला है | Sanatan Sanvad

संघर्ष ही व्यक्तित्व की शिल्पशाला है | Sanatan Sanvad संघर्ष ही व्यक्तित्व की शिल्पशाला है सनातन दृष्टि में जीवन कोई आरामगाह नहीं, बल्कि आत्मा की प्रयोगशाला है। यहाँ मनुष्य को गढ़ा जाता है—तप से, धैर्य से और निरंतर कर्म से। इसलिए यह कथन कि “प्रेशर से ही डायमंड बनते है…

“Minimalism & Detachment” — कम में जीने की चाह | Sanatan Sanvad

“Minimalism & Detachment” — कम में जीने की चाह | Sanatan Sanvad “Minimalism & Detachment” — कम में जीने की चाह एक समय था जब जीवन को सरल रखना स्वाभाविक था। कम वस्तुएँ, सीमित इच्छाएँ और संतोष से भरा मन—यही जीवन की परिभाषा थी। लेकिन आधुनिक समय में अधिक…