सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं
Spiritual Maturity लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

ज्ञान के बिना भक्ति को अपूर्ण क्यों कहा गया

ज्ञान के बिना भक्ति को अपूर्ण क्यों कहा गया ज्ञान के बिना भक्ति को अपूर्ण क्यों कहा गया सनातन दर्शन में भक्ति को अत्यंत ऊँचा स्थान दिया गया है, पर उसी के साथ एक सूक्ष्म और गहन सत्य भी कहा गया है—ज्ञान के बिना भक्ति अपूर्ण रह जाती है। इसका अर्थ नहीं कि भक्ति का…

नम्रता सबसे बड़ा आभूषण है

नमस्कार, मैं तु ना रिं, एक सनातनी। आज मैं उस गुण की बात करने आया हूँ जिसे संसार अक्सर कमज़ोरी समझ लेता है, पर जो वास्तव में मनुष्य की सबसे बड़ी शक्ति है — नम्रता सबसे बड़ा आभूषण है। आभूषण वही होता है जो व्यक्ति के होने को सुंदर बनाए, बोझ न बने। धन, पद, विद्या, शक्ति — ये सब यदि अहंकार …

कृष्ण का बोध: जीवन गणित नहीं, अनुभव की एक अनंत यात्रा है।

स्वीकार्यता और धैर्य: 'तु ना रिं' के साथ जानिए क्यों हर प्रश्न का उत्तर ढूँढना ज़रूरी नहीं है स्वीकार्यता और धैर्य: 'कोंडीकर' के साथ जानिए क्यों हर प्रश्न का उत्तर ढूँढना ज़रूरी नहीं है कोंडीकर 🌊 | सनातन संवाद 💙🦚 “कृष्ण ने कभी यह नहीं …