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भरोसे की भक्ति — जब शिकायत नहीं, केवल समर्पण होता है

भरोसे की भक्ति — जब शिकायत नहीं, केवल समर्पण होता है यह कथा उस भक्ति की है जो शब्दों में नहीं, सहनशीलता में प्रकट होती है—जहाँ शिकायत नहीं होती, केवल भरोसा होता है। एक गाँव के बाहर, खेतों के बीच एक युवा ग्वाला रहता था। दिन भर वह गायों को चराता, वर्षा में भीगता, धूप में जलत…