भरोसे की भक्ति — जब शिकायत नहीं, केवल समर्पण होता है यह कथा उस भक्ति की है जो शब्दों में नहीं, सहनशीलता में प्रकट होती है—जहाँ शिकायत नहीं होती, केवल भरोसा होता है। एक गाँव के बाहर, खेतों के बीच एक युवा ग्वाला रहता था। दिन भर वह गायों को चराता, वर्षा में भीगता, धूप में जलत…
भीष्म ने शिखंडी के सामने शस्त्र क्यों छोड़ दिए? भीष्म ने शिखंडी के सामने शस्त्र क्यों छोड़ दिए? — वह युद्ध, जो बल से नहीं, वचन से जीता गया कुरुक्षेत्र का दसवाँ दिन। युद्ध अपने चरम पर था, पर उसका केंद्र कोई और नहीं— भीष्म थे। जिस दिशा में भीष्म का रथ मुड़ता, उस दिशा मे…
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ (Atom)