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🕉️ सनातन धर्म में नदी पूजा की परंपरा और उसका महत्व | तु ना रिं

🕉️ सनातन धर्म में नदी पूजा की परंपरा और उसका महत्व | तु ना रिं 🕉️ सनातन धर्म में नदी पूजा की परंपरा और उसका महत्व नमस्कार… मैं तु ना रिं, एक सनातनी। सनातन धर्म में प्रकृति को ईश्वर का स्वरूप माना गया है। यही कारण है कि यहां पर्वत, वृक्ष, सूर्य, चंद्रमा …

स्त्री-तत्व और सृष्टि का संतुलन – शास्त्रीय दृष्टि

स्त्री-तत्व और सृष्टि का संतुलन – शास्त्रीय दृष्टि स्त्री-तत्व और सृष्टि का संतुलन – शास्त्रीय दृष्टि सनातन शास्त्रों में स्त्री को केवल सामाजिक भूमिका के रूप में नहीं देखा गया, बल्कि उसे सृष्टि की मूल शक्ति के रूप में समझा गया है। यहाँ स्त्री-तत्व (शक्ति) …

प्राणीमात्र पर दया ही धर्म है

प्राणीमात्र पर दया ही धर्म है प्राणीमात्र पर दया ही धर्म है नमस्कार, मैं तु ना रिं, एक सनातनी। आज मैं उस मूल सत्य की बात करने आया हूँ जिस पर सनातन धर्म की आत्मा टिकी है — प्राणीमात्र पर दया ही धर्म है। यह कोई भावुक वाक्य नहीं, न ही केवल नैत…